Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के दौरान क्या खाएं, क्या न खाएं और कलश स्थापना के जरूरी नियम इस पूरी रिपोर्ट में जानें

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 18 March 2026, 2:32 PM IST
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New Delhi: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व देवी दुर्गा की उपासना और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं और व्रत रखकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत करने पर मां दुर्गा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

नवरात्रि व्रत में क्या खाएं?

व्रत के दौरान सात्विक और हल्का भोजन करना जरूरी होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहे। व्रत में दूध, दही और पनीर का सेवन लाभकारी होता है। ये शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम प्रदान करते हैं। केला, सेब, पपीता, अनार और अन्य मौसमी फल ऊर्जा का अच्छा स्रोत हैं। इनमें प्राकृतिक शर्करा और विटामिन होते हैं। व्रत में सामा के चावल या उससे बने व्यंजन खाए जा सकते हैं। यह हल्का और पचने में आसान होता है। इससे बनी रोटियां या पकवान ऊर्जा देने के साथ पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं।

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नवरात्रि में क्या न खाएं?

व्रत के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करना आवश्यक होता है। गेहूं और सामान्य चावल जैसे अनाज का सेवन न करें। पैकेट वाले और ज्यादा तले-भुने खाद्य पदार्थों से दूरी रखें। प्याज और लहसुन का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। तामसिक भोजन और अत्यधिक मीठी चीजों से बचें।

नवरात्रि व्रत के महत्वपूर्ण नियम

नवरात्रि में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि आचरण और पूजा विधि का भी विशेष महत्व होता है। पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करें और अखंड ज्योति जलाएं। ध्यान रखें कि अखंड ज्योति पूरे नौ दिनों तक जलती रहे। पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखें। प्रतिदिन मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को संयमित रखें। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करें। व्रत का पारण नवमी के बाद दशमी तिथि में करें।

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नवरात्रि का यह पावन समय न केवल भक्ति का, बल्कि शारीरिक और मानसिक शुद्धि का भी अवसर होता है। सही नियमों और आहार का पालन करके आप इस पर्व का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं।

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  • New Delhi

Published : 
  • 18 March 2026, 2:32 PM IST

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