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'सतलुज' के भंवर से बीजेपी का रेस्क्यू ऑपरेशन (Img- X)
Chandigarh: पंजाब की सियासत में 'सतलुज' फिल्म को लेकर धधक रही आग को ठंडा करने के लिए पर्दे के पीछे एक बड़ा डैमेज कंट्रोल ऑपरेशन चलाया गया है। जो बीजेपी कल तक इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए थी, उसने अब अचानक भाईचारे और शांति का राग अलापना शुरू कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा यू-टर्न केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के स्टैंड में देखने को मिला है, जिन्होंने विवाद की कड़वाहट को मिटाने के लिए पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की छवि का सहारा लिया है।
सूत्रों की मानें तो 'सतलुज' फिल्म पर उपजा विवाद पंजाब बीजेपी के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा था। राज्य में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह आभास हो गया था कि इस मुद्दे को ज्यादा खींचने से सिख समुदाय और स्थानीय वोट बैंक में पार्टी के खिलाफ नकारात्मक संदेश जा रहा है।
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पंजाब ने दशकों तक अशांति का जो दौर देखा है, उसके घावों को दोबारा कुरेदना पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता था। यही वजह है कि आलाकमान के इशारे पर इस विवाद को तुरंत खत्म करने का फैसला लिया गया।
तेवर नरम पड़ते ही रवनीत बिट्टू ने अपने सोशल मीडिया पर दिलजीत दोसांझ की तस्वीर के साथ एक बेहद भावुक वीडियो साझा कर नया विमर्श खड़ा किया। उन्होंने संदेश में लिखा कि आनंदपुर साहिब का 'होला' (जहां खालसा की सृजना हुई) और मथुरा की 'होली' (जहां गोबिंद हैं) ये दोनों ही रंग गोबिंद के हैं और मानवता के नाते हम सब एक हैं। दिलजीत जैसी लोकप्रिय हस्ती के जरिए उन्होंने पंजाब में हिंदू-सिख एकता और राष्ट्रीय अखंडता का एक बेहद सधा हुआ संदेश देने की कोशिश की है।
इस रणनीति को आधिकारिक अमलीजामा पहनाते हुए पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी स्पष्ट कर दिया कि 'सतलुज' विवाद का पटाक्षेप होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने बहुत दर्द झेला है और पुराने जख्मों को कुरेदने से किसी का भला नहीं होगा। धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर, पंजाब की शांति और भाईचारा ही पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
Location : Chandigarh
Published : 16 July 2026, 11:08 AM IST