Isauli Assembly Election 2027: क्या ढहेगा समाजवादी पार्टी का गढ़ या बीजेपी का बरसों पुराना सपना रहेगा अधूरा?

सुल्तानपुर की इसौली विधानसभा सीट (187) यूपी की सियासत में बेहद अहम मानी जाती है। पूर्व सीएम पंडित श्रीपति मिश्र और भद्र परिवार की कर्मभूमि रही यह सीट पिछले डेढ़ दशक से सपा का अभेद्य किला है। 2027 के चुनाव को लेकर यहां सपा और बीजेपी के बीच रणनीतिक जंग तेज हो गई है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 7 August 2026, 5:38 PM IST

Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित इसौली विधानसभा क्षेत्र (संख्या-187) राज्य की महत्वपूर्ण और चर्चित ग्रामीण विधानसभा सीटों में से एक है। यह सीट राजनीतिक रूप से इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले पंडित श्रीपति मिश्र 19 जुलाई 1982 से 2 अगस्त 1984 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। लगभग 2 वर्ष 15 दिन के उनके कार्यकाल ने इसौली को प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई।

इतिहास और राजनीतिक विरासत

इसौली विधानसभा सीट वर्ष 1957 के दूसरे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अस्तित्व में आई। पहले ही चुनाव में भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी गया बख्श सिंह ने जीत दर्ज कर इसौली के पहले विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया।

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शुरुआती दशकों में यहां कांग्रेस, जनसंघ और बाद में जनता दल जैसी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव रहा। समय के साथ यह सीट स्थानीय नेतृत्व और प्रभावशाली परिवारों की राजनीति का केंद्र बन गई।

भद्र परिवार का रहा लंबा प्रभाव

इसौली की राजनीति लंबे समय तक पूर्व विधायक इंद्रभद्र सिंह और उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही। वर्ष 1989 में जनता दल तथा 1993 में समाजवादी पार्टी से इंद्रभद्र सिंह विधायक चुने गए। वर्ष 1991 की राम लहर में भाजपा के ओमप्रकाश पांडेय ने जीत दर्ज की, जबकि 1996 में बसपा के जयनारायण तिवारी विधायक बने।

इंद्रभद्र सिंह की हत्या के बाद उनके बड़े पुत्र चंद्रभद्र सिंह 'सोनू' ने राजनीतिक विरासत संभाली और वर्ष 2002 तथा 2007 में विधायक निर्वाचित हुए। इस प्रकार वर्ष 1989 से 2007 तक दो चुनावों को छोड़कर इस सीट पर भद्र परिवार का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

2012 से समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़

पिछले डेढ़ दशक से इसौली समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ बनी हुई है।

- 2012 में सपा के अबरार अहमद विधायक बने।

- 2017 में प्रदेश में भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद अबरार अहमद ने सीट बरकरार रखी।

- 2022 में सपा के मोहम्मद ताहिर खान ने भाजपा के ओम प्रकाश पांडे 'बजरंगी' को मात्र 269 मतों के अंतर से हराकर लगातार तीसरी बार इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा बनाए रखा।

इस सीट से कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी, बसपा और कम्युनिस्ट दलों के प्रत्याशी भी अलग-अलग समय में विधायक बन चुके हैं। क्षेत्र में अब तक कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को नहीं मिला है।

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मतदाता और चुनावी तस्वीर

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के बाद 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार इसौली विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3.52 से 3.55 लाख मतदाता हैं।

- पुरुष मतदाता : लगभग 1.86 लाख

- महिला मतदाता : लगभग 1.68 लाख

- मतदान केंद्र : 233

- मतदान स्थल (पोलिंग बूथ) : 412

जातीय समीकरण तय करते हैं चुनाव

इसौली विधानसभा का चुनाव जातीय समीकरणों के आधार पर सबसे अधिक प्रभावित माना जाता है। करीब 80 हजार मुस्लिम तथा 40 हजार से अधिक यादव मतदाता समाजवादी पार्टी के मजबूत आधार माने जाते हैं। यही मुस्लिम-यादव गठजोड़ पिछले कई चुनावों में सपा की सबसे बड़ी ताकत रहा है।

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भाजपा मुख्य रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, सवर्ण तथा गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं के ध्रुवीकरण पर भरोसा करती है। वर्ष 2022 में इसी रणनीति के चलते भाजपा जीत के बेहद करीब पहुंच गई थी। क्षेत्र में चंद्रभद्र सिंह 'सोनू' और उनके छोटे भाई यशभद्र सिंह 'मोनू' का व्यक्तिगत प्रभाव भी जातीय गणित से ऊपर माना जाता है। उनके समर्थकों की पकड़ सवर्ण और अति पिछड़े वर्गों में भी बताई जाती है।

दलित मतदाता भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि बसपा का पारंपरिक वोट उसके साथ बना रहता है तो उसका अप्रत्यक्ष लाभ समाजवादी पार्टी को मिलता है, जबकि दलित मतों का भाजपा या सपा की ओर झुकाव चुनावी परिणाम बदल सकता है।

इतिहास और विकास की पहचान

इसौली विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हसनपुर रियासत कभी स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र रही। यहां के रजवाड़ों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और देशी सैनिकों का नेतृत्व भी किया। कुड़वार के निकट स्थित गढ़ा का उल्लेख ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है। कहा जाता है कि चीनी यात्री ह्वेनसांग भी यहां आए थे। क्षेत्र में बौद्धकालीन अवशेष और स्तंभ आज भी इतिहास की गवाही देते हैं।

क्षेत्र की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, जबकि लखनऊ-गाजीपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा इसी विधानसभा से होकर गुजरता है, जिससे विकास की नई संभावनाएं जुड़ी हैं।

2027 : टिकट की जंग तेज

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर इसौली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी में वर्तमान विधायक मोहम्मद ताहिर खान के अलावा शकील अहमद, मो. गुफरान अहमद उर्फ सैफी, रिजवान अहमद उर्फ पप्पू, साहबान, मिर्जा माबूद बेग तथा मेराज अहमद खान टिकट के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि वर्तमान विधायक मोहम्मद ताहिर खान की लोकप्रियता में फिलहाल कोई विशेष कमी नहीं मानी जा रही है और उन्हें पुनः टिकट मिलने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।

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भद्र परिवार की ओर से तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन चंद्रभद्र सिंह 'सोनू' तथा यशभद्र सिंह 'मोनू' भी समाजवादी पार्टी से टिकट के दावेदार हो सकते हैं।

भारतीय जनता पार्टी में भी टिकट को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। पिछले दो चुनावों में बेहद कम अंतर से हारने वाले ओम प्रकाश पांडे 'बजरंगी' मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।उनके अलावा रामचंद्र मिश्र, विकास शुक्ल, ऊषा सिंह बबीता तिवारी, मनीषा पांडेय, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी तथा लंभुआ के पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी के नाम भी चर्चा में हैं। भाजपा के सहयोगी दल राष्ट्रीय सुहैल देव पार्टी से शिव कुमार सिंह भी टिकट की प्रबल दावेदारी कर रहे है।

वहीं बहुजन समाज पार्टी की ओर से अफ्तार अहमद को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

भाजपा के लिए चुनौती, सपा के लिए प्रतिष्ठा

वर्ष 2027 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए इसौली सीट पर कब्जा करने की बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पार्टी ने अभी से संगठन और चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पिछले महीने सुलतानपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसौली क्षेत्र के लिए विकास परियोजनाओं की घोषणा करते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि यहां भाजपा का विधायक होता तो क्षेत्र और अधिक विकास करता।

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दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी अपने मजबूत गढ़ को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

नजर 2027 पर

मुख्यमंत्री देने वाली इस ऐतिहासिक विधानसभा सीट पर एक बार फिर मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के सामने अपना अभेद्य किला बचाने की चुनौती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी वर्षों से अधूरी जीत के इंतजार को समाप्त करने की कोशिश में है।

Location :  Sultanpur

Published :  7 August 2026, 5:38 PM IST