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दिल्ली हाई कोर्ट ने जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है। दोनों ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल न किए गए दस्तावेज देने से इनकार किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी (Image Source; Google)
New Delhi: जमीन के बदले नौकरी मामले में सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद बहुचर्चित केस को फिर सुर्खियों में ला दिया। लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है।
याचिका में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर रहा, वे भी बचाव पक्ष के लिए बेहद जरूरी हैं। लालू-राबड़ी की ओर से दलील दी गई कि इन दस्तावेजों के बिना अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाहों, खासकर अहम गवाहों और अप्रूवरों, से प्रभावी जिरह करना मुश्किल होगा। हाई कोर्ट ने इसी पहलू पर CBI से जवाब मांगा है।
इससे पहले 18 मार्च को ट्रायल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की उस मांग को ठुकरा दिया था, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल न किए गए दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया के तहत अभियोजन पहले उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखता है, जिन पर उसने भरोसा किया है। ऐसे में जिन दस्तावेजों को अभियोजन ने अपने केस का हिस्सा नहीं बनाया है, उन्हें जिरह की शर्त के तौर पर मांगना स्वीकार्य नहीं है।
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कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को मुकदमे की प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश भी माना था। वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए सभी जरूरी दस्तावेजों तक पहुंच मिलना उनका अधिकार है। अब इस कानूनी टकराव पर अंतिम दिशा हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई में साफ हो सकती है। यह मामला इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि ट्रायल अब महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है।
CBI का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले जमीन लिए जाने का खेल हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि नौकरी चाहने वालों या उनके रिश्तेदारों ने पटना और अन्य स्थानों पर अपनी जमीन लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं को बेहद कम कीमत पर बेची या उपहार में दे दी। बदले में रेलवे में नियुक्तियां दिलाई गईं।
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CBI ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया है। जनवरी 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों समेत कई आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए थे। हालांकि लालू परिवार ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया है। अब सभी की नजर 1 अप्रैल 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस केस की दिशा कुछ और साफ हो सकती है।