UP Election 2027: बंगाल मिशन पूरा अब यूपी साधने की तैयारी में भाजपा, कल होगा योगी का मंत्रिमंडल विस्तार

योगी कैबिनेट विस्तार 10 मई को संभव। सीएम योगी आज राज्यपाल से करेंगे मुलाकात। अखिलेश यादव के PDA और UGC हमले के बीच BJP का बड़ा चुनावी दांव।

Updated : 9 May 2026, 6:00 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों पर कल विराम लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक रविवार (10 मई) को राजभवन में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। इस विस्तार को 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और विपक्ष के तीखे हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

आज राज्यपाल से मिलेंगे सीएम योगी

कैबिनेट विस्तार की औपचारिकताओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी शनिवार (9 मई) शाम करीब 6:30 बजे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नामों पर अंतिम मुहर और शपथ ग्रहण के समय पर चर्चा होने की प्रबल संभावना है।

ये 6 नाम रेस में सबसे आगे

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में वर्तमान में 54 मंत्री कार्यरत हैं, जबकि संवैधानिक नियमों के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 60 तक हो सकती है, जिससे फिलहाल 6 पद रिक्त हैं। सूत्रों के अनुसार इन खाली पदों को भरने के लिए संभावित नामों पर चर्चा काफी तेज हो गई है, जिसमें समाजवादी पार्टी की बागी विधायक पूजा पाल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिन्हें 'PDA' समीकरण को साधने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

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इसके साथ ही रायबरेली के कद्दावर नेता और सपा के पूर्व मुख्य सचेतक मनोज पाण्डेय, कृष्णा पासवान, भूपेंद्र चौधरी, अशोक कटारिया और रोमी साहनी के नामों पर भी कैबिनेट में शामिल होने की मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि इन चेहरों को जगह देकर भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को मजबूत करना चाहती है।

अखिलेश यादव की घेराबंदी और 'PDA' की काट

योगी सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। अखिलेश यादव अपनी 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

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विशेष रूप से UGC रेगुलेशन 2026 को लेकर विपक्ष ने भाजपा को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। पल्लवी पटेल और अन्य विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे को जमीन पर उतारने और दलित-पिछड़ा विरोधी करार देने के बाद भाजपा पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में बागी सपा विधायकों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को कैबिनेट में शामिल कर भाजपा सोशल इंजीनियरिंग के जरिए विपक्ष के 'नैरेटिव' को ध्वस्त करना चाहती है।

बृजभूषण शरण सिंह और ओमप्रकाश राजभर जैसे नेताओं की हालिया बयानबाजी के बीच यह कैबिनेट विस्तार भाजपा के लिए अपने कुनबे को एकजुट रखने और सहयोगियों को संतुष्ट करने का बड़ा दांव साबित हो सकता है।

Location :  Lucknow

Published :  9 May 2026, 5:54 PM IST

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