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हम रोज कीबोर्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन शायद ही कभी सोचते हैं कि इसमें ABCDE जैसी सीधी लाइन क्यों नहीं होती। इसका जवाब टाइपराइटर के दौर से जुड़ा है। QWERTY लेआउट किसी संयोग से नहीं, बल्कि एक खास जरूरत के कारण बना और आज तक चला आ रहा है।


हम रोज मोबाइल और कंप्यूटर पर कीबोर्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन शायद ही कभी सोचते हैं कि इसमें अक्षर ABCDE की तरह सीधी लाइन में क्यों नहीं होते। स्कूल में हमें अल्फाबेट क्रम से पढ़ाया जाता है, लेकिन कीबोर्ड पर पहुंचते ही वही अक्षर बिखरे हुए नजर आते हैं। इसके पीछे वजह सिर्फ डिज़ाइन नहीं, बल्कि इतिहास है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



कीबोर्ड का मौजूदा लेआउट करीब 150 साल पुराने टाइपराइटर से जुड़ा हुआ है। शुरुआती टाइपराइटर में अगर अक्षर पास-पास होते, तो टाइप करते समय धातु की छड़ें आपस में टकरा जाती थीं। इससे मशीन जाम हो जाती थी और काम बार-बार रुक जाता था।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



इस तकनीकी समस्या से बचने के लिए इंजीनियरों ने अक्षरों को इस तरह फैलाया कि ज्यादा इस्तेमाल होने वाले बटन एक-दूसरे से दूर रहें। इसी प्रयोग से QWERTY लेआउट बना। इसका मकसद टाइपिंग को तेज करना नहीं, बल्कि टाइपराइटर को जाम होने से बचाना था।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



आज डिजिटल कीबोर्ड में न तो धातु की छड़ें हैं और न जाम होने का खतरा। फिर भी QWERTY लेआउट बना हुआ है, क्योंकि करोड़ों लोग इसी पर टाइप करना सीख चुके हैं। अचानक ABCDE लाइन वाला कीबोर्ड लाने से ज्यादातर यूज़र्स को दिक्कत हो सकती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)



देखने में ABCDE सीधी लाइन आसान लगती है, लेकिन उंगलियों की नैचुरल मूवमेंट के हिसाब से QWERTY ज्यादा आरामदायक माना जाता है। असल में कीबोर्ड का यह डिज़ाइन सुविधा से ज्यादा इतिहास और इंसानी आदतों पर टिका है, जो आज भी बदला नहीं है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
