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जब आज वह बाजार में कोई चीज़ देखती है, तो पिता का वो सुकून भरा हाथ साथ नहीं होता जो कहता था कि ले लो, मैं दिला दूंगा। अब उसे खुद समझ आता है कि जिंदगी की हर छोटी-बड़ी जरूरत और चुनौती के लिए इंसान को खुद ही खड़ा होना पड़ता है। अब उसे हर मोड़ पर खुद समझदार, तेज और चालाक बनने की भारी कोशिश करनी पड़ती है। (Img- Pinterest)

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 6 August 2026, 3:58 PM IST
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Published :  6 August 2026, 3:56 PM IST

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