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रिसर्च की कुछ सीमाएं भी सामने आईं। अधिकांश अध्ययन 12 महीने से कम अवधि के थे और उनकी गुणवत्ता मध्यम स्तर की रही। प्रतिभागियों से यह भी नहीं पूछा गया कि वे इस डाइट से कितने संतुष्ट थे या इसे लंबे समय तक अपनाना कितना आसान था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फास्टिंग का असर शरीर की जैविक घड़ी और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर पड़ सकता है, लेकिन इंसानों में इन दावों के समर्थन में अभी ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। (Img: Google)
Published : 18 February 2026, 5:04 PM IST