Maruti नहीं, अब सभी के लिए एक सा नियम! सरकार ने रद्द की छोटी कारों की राहत, जानिये क्या है बड़ा अपडेट

भारत सरकार ने फ्यूल एफिशिएंसी और वाहन एमिशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब छोटी कारों को दी जाने वाली प्रस्तावित छूट पूरी तरह खत्म कर दी गई है। यह जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट और सरकारी डॉक्युमेंट से सामने आई है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 7 February 2026, 3:30 PM IST
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1 / 5 \"Zoom\"पहले सितंबर में जारी ड्राफ्ट में 909 किलोग्राम या उससे कम वजन वाली पेट्रोल कारों को नियमों में छूट देने का प्रस्ताव था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है। छोटी कारों को मिलने वाली इस राहत का विरोध टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों ने किया था। उनका मानना था कि यह छूट केवल मारुति सुजुकी जैसी एक कंपनी के पक्ष में जाती, क्योंकि भारत में छोटे कार सेगमेंट में उसका लगभग 95 प्रतिशत मार्केट शेयर है। (Img- Internet)
2 / 5 \"Zoom\"इस असंतुलन को देखते हुए सरकार ने छोटी कारों के लिए अलग नियम बनाने का विचार छोड़ दिया। परिवहन क्षेत्र भारत की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करता है और यह पेट्रोलियम आयात और कार्बन इमिशन का बड़ा कारण है। सरकारी डॉक्युमेंट के अनुसार, पैसेंजर व्हीकल्स से होने वाला एमिशन इस सेक्टर के कुल एमिशन का करीब 90 प्रतिशत है। इसी वजह से सरकार ने CO2 एमिशन को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। (Img- Internet)
3 / 5 \"Zoom\"कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और अगले 5 साल तक प्रभावी रहेंगे। ये नियम 3,500 किलोग्राम से कम वजन वाली सभी यात्री गाड़ियों पर लागू होंगे। हर 5 साल में इन नियमों को अपडेट किया जाएगा ताकि कंपनियों को इलेक्ट्रिक, CNG और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी साफ तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। (Img- Internet)
4 / 5 \"Zoom\"संशोधित योजना के तहत अब भारी गाड़ियों को मिलने वाली राहत भी सीमित कर दी गई है। कंपनियों को अपनी इंटरनल एफिशिएंसी में सुधार करना होगा। नियमों का पालन न करने पर प्रति कार लगभग 550 डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2032 तक औसत फ्लीट एमिशन को 114 ग्राम प्रति किमी से घटाकर करीब 100 ग्राम प्रति किमी करना है। (Img- Internet)
5 / 5 \"Zoom\"सरकार का उद्देश्य केवल एमिशन कम करना नहीं है, बल्कि फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाकर देश में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देना भी है। नए नियम कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे, लेकिन पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम माना जा रहा है। (Img- Internet)

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 7 February 2026, 3:30 PM IST

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