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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कम प्रदूषण, कम मेंटेनेंस कॉस्ट और स्मूद ड्राइविंग एक्सपीरियंस के चलते EVs आम लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं। लेकिन इन गाड़ियों की एक बड़ी कमी लंबे समय से सामने आती रही है—कम स्पीड पर इनका लगभग बिना आवाज के चलना। यही खामोशी कई बार पैदल यात्रियों, बुजुर्गों, बच्चों, साइकिल सवारों और दृष्टिबाधित लोगों के लिए खतरा बन जाती है। इसी सुरक्षा चिंता को ध्यान में रखते हुए सरकार और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। (Img Source: Google)
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कम प्रदूषण, कम मेंटेनेंस कॉस्ट और स्मूद ड्राइविंग एक्सपीरियंस के चलते EVs आम लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं। लेकिन इन गाड़ियों की एक बड़ी कमी लंबे समय से सामने आती रही है—कम स्पीड पर इनका लगभग बिना आवाज के चलना। यही खामोशी कई बार पैदल यात्रियों, बुजुर्गों, बच्चों, साइकिल सवारों और दृष्टिबाधित लोगों के लिए खतरा बन जाती है। इसी सुरक्षा चिंता को ध्यान में रखते हुए सरकार और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। (Img Source: Google)