Digestion Tips: खाना खाने के बाद करें ये 4 योगासन, गैस-कब्ज और पेट फूलने की परेशानी में मिल सकती है राहत
गैस, कब्ज और पेट फूलने की परेशानी में योग दिनचर्या का उपयोगी हिस्सा हो सकता है। जानिए वज्रासन, कैट-काउ, पवनमुक्तासन और भुजंगासन करने का तरीका, इनके संभावित फायदे और अभ्यास के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियां।
खराब पाचन की वजह से पेट फूलना, गैस, कब्ज, भारीपन और पेट में असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके पीछे खान-पान के साथ शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे में नियमित योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना उपयोगी हो सकता है। योग शरीर की गतिशीलता, सांस लेने के अभ्यास और तनाव कम करने में मदद करता है। हालांकि, इसके परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। (Img- Pinterest)
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वज्रासन योग की एक आसान बैठने वाली मुद्रा है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों के ऊपर बैठा जाता है और रीढ़ को सीधा रखा जाता है। पारंपरिक रूप से इसे भोजन के बाद किया जाता है। इस मुद्रा में शरीर को शांत रखकर कुछ समय बैठा जा सकता है। हालांकि, वज्रासन से पाचन तुरंत तेज होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है। घुटनों या टखनों में दर्द हो तो सावधानी बरतें। (Img- Pinterest)
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मार्जरासन-बिटिलासन को कैट-काउ पोज भी कहा जाता है। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल आएं। सांस लेते हुए पीठ को धीरे-धीरे नीचे करें और छाती को थोड़ा ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर गोल करें और सिर को सहज रूप से नीचे झुकाएं। इस अभ्यास से रीढ़ की गतिशीलता बेहतर करने में मदद मिल सकती है। शरीर की हल्की मूवमेंट कुछ लोगों को पेट के भारीपन में आरामदायक महसूस हो सकती है। (Img- Pinterest)
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पवनमुक्तासन में पीठ के बल लेटकर एक या दोनों घुटनों को धीरे-धीरे पेट की ओर लाया जाता है। इस दौरान सांस सामान्य रखें और शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। योग में इस आसन को गैस से जुड़ी असहजता के लिए उपयोगी माना जाता है, हालांकि इसके प्रभाव के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। कमर या पेट में दर्द होने पर इसे करने से बचें। किसी परेशानी में दर्द बढ़े तो अभ्यास रोक दें। (Img- Pinterest)
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भुजंगासन यानी कोबरा पोज में पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के पास रखें और ऊपरी शरीर को धीरे-धीरे उठाएं। कमर पर अधिक दबाव न डालें और अपनी क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें। यह आसन सीधे पाचन तेज करने का प्रमाणित तरीका नहीं है, लेकिन योग और नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा हो सकते हैं। गैस-कब्ज लगातार बनी रहे, तेज दर्द हो या मल में खून आए तो डॉक्टर से सलाह लें। (Img- Pinterest)
खराब पाचन की वजह से पेट फूलना, गैस, कब्ज, भारीपन और पेट में असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके पीछे खान-पान के साथ शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे में नियमित योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना उपयोगी हो सकता है। योग शरीर की गतिशीलता, सांस लेने के अभ्यास और तनाव कम करने में मदद करता है। हालांकि, इसके परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। (Img- Pinterest)
वज्रासन योग की एक आसान बैठने वाली मुद्रा है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों के ऊपर बैठा जाता है और रीढ़ को सीधा रखा जाता है। पारंपरिक रूप से इसे भोजन के बाद किया जाता है। इस मुद्रा में शरीर को शांत रखकर कुछ समय बैठा जा सकता है। हालांकि, वज्रासन से पाचन तुरंत तेज होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है। घुटनों या टखनों में दर्द हो तो सावधानी बरतें। (Img- Pinterest)
मार्जरासन-बिटिलासन को कैट-काउ पोज भी कहा जाता है। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल आएं। सांस लेते हुए पीठ को धीरे-धीरे नीचे करें और छाती को थोड़ा ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर गोल करें और सिर को सहज रूप से नीचे झुकाएं। इस अभ्यास से रीढ़ की गतिशीलता बेहतर करने में मदद मिल सकती है। शरीर की हल्की मूवमेंट कुछ लोगों को पेट के भारीपन में आरामदायक महसूस हो सकती है। (Img- Pinterest)
पवनमुक्तासन में पीठ के बल लेटकर एक या दोनों घुटनों को धीरे-धीरे पेट की ओर लाया जाता है। इस दौरान सांस सामान्य रखें और शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। योग में इस आसन को गैस से जुड़ी असहजता के लिए उपयोगी माना जाता है, हालांकि इसके प्रभाव के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। कमर या पेट में दर्द होने पर इसे करने से बचें। किसी परेशानी में दर्द बढ़े तो अभ्यास रोक दें। (Img- Pinterest)
भुजंगासन यानी कोबरा पोज में पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के पास रखें और ऊपरी शरीर को धीरे-धीरे उठाएं। कमर पर अधिक दबाव न डालें और अपनी क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें। यह आसन सीधे पाचन तेज करने का प्रमाणित तरीका नहीं है, लेकिन योग और नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा हो सकते हैं। गैस-कब्ज लगातार बनी रहे, तेज दर्द हो या मल में खून आए तो डॉक्टर से सलाह लें। (Img- Pinterest)