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बारामती में हुए विमान हादसे से पहले पायलट द्वारा दिए गए Mayday Call ने सबका ध्यान खींचा है। आखिर क्या होता है मेडे कॉल, कब और क्यों दिया जाता है, और कैसे यह जान बचाने में मदद करता है-इस रिपोर्ट में समझिए।
इमरजेंसी मैसेज और उसके बाद मच गई अफरा-तफरी (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: बारामती में एक विमान हादसे की खबरों के बीच "Mayday Call" शब्द एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि लैंडिंग से पहले पायलट ने मेडे कॉल दिया था। हालांकि हादसे और उसमें हुए नुकसान को लेकर आधिकारिक पुष्टि और जांच अभी जारी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह समझना जरूरी बना दिया है कि आखिर मेडे कॉल होता क्या है, कब और क्यों दिया जाता है, और इसका महत्व क्या है।
Mayday कॉल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आपातकालीन संकेत है। विमानन और समुद्री दोनों क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी विमान या जहाज पर जीवन-घातक संकट आ जाए। एविएशन की भाषा में यह सबसे ऊंचे स्तर का इमरजेंसी सिग्नल माना जाता है। जैसे ही पायलट "मेडे, मेडे, मेडे" कहकर रेडियो पर संदेश देता है, यह संकेत होता है कि विमान गंभीर खतरे में है और उसे तुरंत सहायता चाहिए।
'Mayday' शब्द की जड़ फ्रेंच भाषा में है। यह फ्रेंच शब्द "m'aider" (या "m'aidez") से लिया गया है, जिसका अर्थ है- "मेरी मदद करो।" चूंकि यह उच्चारण में सरल है और रेडियो संचार में आसानी से समझ में आ जाता है, इसलिए इसे अंतरराष्ट्रीय आपात संकेत के रूप में अपनाया गया। यही वजह है कि दुनिया के किसी भी कोने में मेडे कॉल सुनते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और संबंधित एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं।
महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता व डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार 6 लोगों की मौत की खबर है। घटना के बाद प्रशासन और राहत टीमें मौके पर पहुंच गईं #AjitPawar #PlaneCrash #BreakingNews#Maharashtra #NCP… pic.twitter.com/exzKx0CySC
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) January 28, 2026
पायलट मेडे कॉल तभी देता है जब स्थिति बेहद गंभीर हो और जान को खतरा हो। इसमें कई हालात शामिल हो सकते हैं-
जैसे ही मेडे कॉल प्रसारित होती है, रेडियो फ्रीक्वेंसी पर बाकी सभी गैर-जरूरी संचार रोक दिए जाते हैं। ATC उस विमान को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। रनवे खाली कराया जाता है, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और रेस्क्यू टीमें अलर्ट पर रखी जाती हैं। इसका मकसद समय की एक-एक सेकंड बचाकर जान-माल की रक्षा करना होता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने मृतकों के परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त की और इस अपूरणीय क्षति को दुखद बताया। #AjitPawar #DroupadiMurmu #PlaneCrash#Maharashtra #NCP #Deputycm @rashtrapatibhvn pic.twitter.com/YhOxFKHafZ
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बता दें कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान बारामती तालुका में क्रैश हो गया। डीजीसीए ने पुष्टि की है कि इस हादसे में उनके निधन की खबर आई है। SP ग्रामीण पुणे संदीप सिंह ने बताया कि दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हो गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।
अजित पवार को जिला परिषद और पंचायत समिति के सार्वत्रिक चुनाव प्रचार के तहत कई सभाओं को संबोधित करना था। उनका कार्यक्रम सुबह 10 बजे निरावागज से शुरू होना था, इसके बाद दोपहर 12 बजे पंढरे और 3 बजे करंजेपुल में जनसभाओं को संबोधित करना था। उनका अंतिम कार्यक्रम शाम 5:30 बजे सुपा में प्रस्तावित था।
बारामती में सामने आई विमान दुर्घटना की खबरों में यह बात सामने आई है कि पायलट ने लैंडिंग से पहले मेडे कॉल दिया था। इससे संकेत मिलता है कि विमान किसी गंभीर तकनीकी या परिचालन समस्या से जूझ रहा था। हालांकि हादसे की असली वजह- तकनीकी खराबी, मौसम या कोई अन्य कारण- यह सब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। डीजीसीए और अन्य संबंधित एजेंसियां घटनास्थल की जांच कर रही हैं।
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अक्सर किसी हादसे के बाद "मेडे कॉल" शब्द सुर्खियों में आता है, लेकिन इसकी गंभीरता और प्रक्रिया को कम लोग समझते हैं। मेडे कॉल केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक पूरी आपात व्यवस्था को सक्रिय करने का ट्रिगर है। यह पायलट और बचाव एजेंसियों के बीच जीवन बचाने की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
इतना समझना जरूरी है कि जब भी "मेडे, मेडे, मेडे" की आवाज रेडियो पर गूंजती है, तो वह किसी बेहद नाजुक स्थिति का संकेत होती है- जहां हर पल कीमती होता है और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।