उन्नाव दुष्कर्म मामला: सेंगर की जमानत पर सीबीआई जाएगी सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

उन्नाव दुष्कर्म मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट जाएगी। एजेंसी का कहना है कि पीड़िता की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 25 December 2025, 3:52 AM IST
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New Delhi: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए गए भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर जमानत दिए जाने के आदेश का अध्ययन करने के बाद सीबीआई ने इसे चुनौती देने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को इसकी पुष्टि की।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जल्द दायर होगी एसएलपी

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) जल्द से जल्द दाखिल की जाएगी। एजेंसी का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और पीड़िता व उसके परिवार की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर आशंकाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।

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जमानत का सीबीआई और पीड़िता के परिवार ने किया था विरोध

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई और पीड़िता के परिवार ने सेंगर की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने अदालत के समक्ष सुरक्षा खतरे और धमकियों का हवाला देते हुए कहा था कि आरोपी के रिहा होने से पीड़िता और उसके परिजनों की जान को खतरा हो सकता है। सीबीआई ने समय रहते अपना जवाब और लिखित दलीलें भी दाखिल की थीं।

दूसरे मामले में अभी भी जेल में रहेगा सेंगर

हालांकि हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। वह दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषी ठहराया गया है और उस मामले में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई है, जिसे वह वर्तमान में काट रहा है।

हाईकोर्ट ने क्यों निलंबित की उम्रकैद की सजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले में सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया था। अदालत ने कहा कि सेंगर अब तक सात साल और पांच महीने से अधिक समय जेल में बिता चुका है। उसकी अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित करने का आदेश दिया गया।

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कई सख्त शर्तों के साथ दी गई जमानत

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरिश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की तीन जमानतें भरने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि सेंगर पीड़िता के दिल्ली स्थित निवास के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा और न ही पीड़िता या उसकी मां को किसी भी प्रकार की धमकी देगा।

2017 का मामला, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली हुआ था ट्रायल

कुलदीप सिंह सेंगर को वर्ष 2017 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया था। इस मामले और इससे जुड़े अन्य प्रकरणों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक अगस्त 2019 को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। दिसंबर 2019 में निचली अदालत ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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  • New Delhi

Published : 
  • 25 December 2025, 3:52 AM IST

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