ट्रेन से यात्री का बैग चोरी होने पर कोर्ट का कड़ा फैसला, रेलवे को देना होगा मुआवजा; जानें आखिर क्या है मामला

ट्रेन से यात्री का बैग चोरी होने के मामले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उत्तर रेलवे की अपील खारिज करते हुए पीड़ित यात्री को 1.45 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश बरकरार रखा है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 10 October 2026, 11:17 AM IST
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New Delhi: भारतीय ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और उनके सामान की हिफाजत को लेकर दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बेहद कड़ा और अहम फैसला सुनाया है।

आयोग ने उत्तर रेलवे (Northern Railway) की उस अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें रेलवे ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि पीड़ित रेल यात्री को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा हर हाल में दिया जाए।

क्या था पूरा मामला और कैसे हुई घटना?

यह पूरा मामला 7 जून 2014 का है, जब पीड़ित यात्री अजय कुमार दिल्ली से पटना के लिए महानंदा एक्सप्रेस के आरक्षित (रिजर्व) कोच में सफर कर रहे थे। ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास अज्ञात चोरों ने उनके सफर के दौरान ट्रॉली बैग पर हाथ साफ कर दिया।

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इस चोरी गए बैग में कीमती साड़ियां, सोने-चांदी के गहने और महंगे कपड़े रखे हुए थे। यात्री ने इस सुरक्षा चूक के खिलाफ कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर अब आयोग का यह बड़ा फैसला आया है।

रेलवे की दलील और आयोग का कड़ा रुख

सुनवाई के दौरान उत्तर रेलवे की ओर से दलील दी गई थी कि चोरी हुआ सामान यात्री की अपनी निजी निगरानी में था और इसे रेलवे के पास अलग से बुक या घोषित नहीं किया गया था। रेलवे ने 'रेलवे एक्ट की धारा 100' का हवाला देते हुए अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया था। हालांकि, आयोग ने रेलवे की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

आयोग की पीठ (अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी) ने दोटूक कहा कि आरक्षित डिब्बे में किसी भी अनधिकृत या बिना टिकट व्यक्ति का घुसना सीधे तौर पर रेलवे कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

मुआवजे और ब्याज का पूरा गणित

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रिजर्व डिब्बों में बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकना रेलवे स्टाफ की प्राथमिक और बुनियादी जिम्मेदारी है। इस सुरक्षा चूक के लिए रेलवे अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।

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अदालत ने आदेश दिया है कि रेलवे को सामान की कीमत के एवज में 1.20 लाख रुपये (9% वार्षिक ब्याज के साथ) और मानसिक उत्पीड़न व मुकदमे के लिए 25,000 रुपये अतिरिक्त मुआवजा यानी कुल मिलाकर लगभग 1.45 लाख रुपये पीड़ित यात्री को देने होंगे।

Location :  New Delhi

Published :  10 October 2026, 11:17 AM IST

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