सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, इस मामले में कोर्ट को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले को पलट दिया है इसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट को फटकार भी लगाई है। कोर्ट ने 10 फरवरी को यह ऑर्डर एक सुओ मोटो याचिका पर दिया था, जिसमें उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऑर्डर का संज्ञान लिया था।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 18 February 2026, 2:41 PM IST

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की और 10 फरवरी को उच्च न्यायालय के फैसले को पलटने का आदेश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पोक्सो कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ लगे सख्त आरोपों को भी बहाल कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया के साथ कहा कि यौन अपराधों के मामलों में फैसले के लिए कानूनी तर्क और सहानुभूति दोनों की जरूरत होती है।

मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि नाड़ा खींचना या तोड़ना और आरोपी को पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश सिर्फ दुष्कर्म करने की तैयारी है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि पायजामे का नाड़ा खींचना और स्तन छूना साफ तौर पर दुष्कर्म की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पलटते हुए आरोपियों के खिलाफ लगे सख्त आरोपों को भी बहाल कर दिया।

HC के फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत दो आरोपियों के खिलाफ रेप की कोशिश के असली कड़े चार्ज को बहाल कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि जो फैक्ट्स बताए गए हैं, उन्हें देखते हुए, हम हाई कोर्ट के इस नतीजे से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप सिर्फ रेप के अपराध को करने की तैयारी के हैं।

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क्या है मामला

जानकारी के अनुसार 10 नवंबर 2021 को एक महिला ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि वह और उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी उसकी ननद के घर से वापस अपने घर लौट रहे थे। इस दौरान उनके गांव के ही पवन, आकाश और अशोक ने उनकी बेटी को मोटरसाइकिल पर घर छोड़ने की पेशकश की।

महिला ने आरोप लगाया कि तीनों आरोपियों ने उसकी बेटी से छेड़छाड़ की और उसके पायजामे का नाड़ा भी खींच लिया। बच्ची की चीख सुनकर दो लोग वहां पहुंचे और उन्हें देखकर तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए।

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नाबालिग के अभिभावक पुलिस के पास गए। वहां पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की तो उन्होंने अदालत का रुख किया। निचली अदालत ने आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया। समन में पॉक्सो अधिनियम की धारा 18 ( अपराध करने का प्रयास ) औऱ धारा 376 के अंतर्गत जांच करने का निर्देश दिया गया था। जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

 

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Published : 
  • 18 February 2026, 2:41 PM IST