
सोशल मीडिया बैन
New Delhi: ऑस्ट्रेलिया की संसद ने नवंबर 2024 में ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट, 2021 में बड़ा संशोधन किया था, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के किशोरों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध की प्रक्रिया शुरू हुई। अब इस फैसले के तहत किशोरों के लिए सिर्फ कुछ खास कंटेंट नहीं, बल्कि पूरा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रतिबंधित किया जा रहा है। इस प्रतिबंध का लक्ष्य किशोरों की सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करना है, जिससे उन्हें हानिकारक डिजिटल प्रभावों से बचाया जा सके।
अब यूट्यूब पर भी प्रतिबंध
पहले यूट्यूब को इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन अब 30 जुलाई 2025 को इसे भी आंशिक रूप से प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स में शामिल कर लिया गया है। किशोर अब यूट्यूब पर सिर्फ वीडियो देख सकेंगे, लेकिन वे न अकाउंट बना सकेंगे, न ही कमेंट या लाइक कर सकेंगे। यह फैसला नई संचार मंत्री अनिका वेल्स के कार्यभार संभालने के बाद लिया गया, जिन्हें ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट की ओर से यह सिफारिश मिली थी। एक सर्वे में पाया गया कि हर चार में से एक व्यक्ति ने यूट्यूब पर हानिकारक कंटेंट देखा था।
क्यों जरूरी समझी गई यह पाबंदी?
सरकार का दावा है कि यह फैसला किशोरों की मानसिक और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज पहले भी कह चुके हैं कि जब बच्चों की सुरक्षा की बात आती है, तो सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। सरकार का यह भी मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को ऐसे प्लेटफॉर्म्स के दुष्प्रभाव से बचाएं। इस फैसले को 77% नागरिकों ने एक ऑनलाइन पोल में समर्थन भी दिया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम मानते हैं।
कौन-कौन से प्लेटफॉर्म्स पाबंदी के दायरे में आएंगे?
• फेसबुक
• इंस्टाग्राम
• एक्स (पूर्व में ट्विटर)
• स्नैपचैट
• रेडिट
• टिकटॉक
• यूट्यूब (आंशिक प्रतिबंध)
प्रतिबंध कब से और कैसे लागू होंगे?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध 2025 के अंत तक चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। इसके लिए सोशल मीडिया कंपनियों को यूज़र वेरिफिकेशन सिस्टम तैयार करने को कहा गया है।
लागू करने की प्रक्रिया
• कंपनियों को उम्र की पहचान करने वाली तकनीक अपनानी होगी।
• 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोका जाएगा।
• पहले से बने अकाउंट को कंपनियों को डिएक्टिवेट करना होगा।
• सरकार की ओर से आधिकारिक आईडी अनिवार्य नहीं की जाएगी, लेकिन वैकल्पिक तरीके से सत्यापन की व्यवस्था की जाएगी।
• नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
छिपकर इस्तेमाल करने वालों को नहीं मिलेगा दंड
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई किशोर या उसके परिजन गोपनीय तरीके से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, तो उन पर कोई कानूनी कार्रवाई या जुर्माना नहीं किया जाएगा। इस नियम का मकसद बच्चों को सज़ा देना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों को जवाबदेह बनाना है।
फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
जहां कुछ संगठनों ने इस फैसले को किशोरों की स्वतंत्रता पर रोक बताया है, वहीं बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम की प्रशंसा की है। डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हानिकारक कंटेंट तेजी से फैलता है और किशोरों पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
Location : New Delhi
Published : 31 July 2025, 9:00 AM IST
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