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77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के एक्सिओम मिशन के पायलट रहे और राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बने।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया
New Delhi: आज 77वें गणतंत्र दिवस 2026 परेड के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री और फाइटर पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें उनके अद्वितीय साहस, वीरता और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रदान किया गया। शुक्ला पिछले साल अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के ऐतिहासिक एक्सिओम मिशन के पायलट के रूप में शामिल थे।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारत के अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले पायलट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। राकेश शर्मा को भी उनके साहस और योगदान के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। शुक्ला की इस उपलब्धि ने भारत के अंतरिक्ष और सैन्य क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छुआ है।
अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांति-कालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों और नागरिकों को दिया जाता है, जिन्होंने शांति के समय असाधारण साहस और निडरता का परिचय देते हुए जीवन की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा और सुरक्षा में योगदान दिया हो।
इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1950 में की गई थी और इसे पहले “अशोक चक्र वर्ग- I” कहा जाता था। बाद में इसे संक्षेप में “अशोक चक्र” नाम दिया गया। यह पदक गोलाकार होता है, जिसके केंद्र में अशोक स्तंभ अंकित रहता है और इसे हरे-नारंगी फीते के साथ पहनाया जाता है।
अशोक चक्र पाने वाले कई वीरों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों, बंधक मुक्ति अभियानों और राष्ट्रहित में अपने प्राणों की आहुति दी है। यह पुरस्कार भारतीय वीरता, त्याग और निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष मिशन और साहस ने इसे और अधिक गौरवपूर्ण बना दिया।
इस अवसर पर गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं, थल सेना, नौसेना और वायु सेना के अनुशासित और सामरिक प्रदर्शन ने देशवासियों को रोमांचित कर रहे हैं। परेड में आधुनिक हथियारों और स्वदेशी तकनीक के अद्भुत प्रदर्शन ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संदेश को जीवंत किया।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला का अशोक चक्र से सम्मानित होना न केवल उनके व्यक्तिगत साहस का सम्मान है, बल्कि यह पूरे देश के वीर जवानों और वैज्ञानिकों की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।