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स्कूल मैनेजमेंट कमेटी(Source: Google)
New Delhi: देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार बुधवार को स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की नई गाइडलाइन जारी करने वाली है। इस नई नीति के तहत अब स्कूलों के संचालन की मुख्य जिम्मेदारी अभिभावकों को सौंपी जाएगी। अब तक इन कमेटियों का संचालन स्कूल के प्रिंसिपल करते थे, लेकिन अब अभिभावक ही शिक्षा और प्रबंधन के केंद्र में होंगे।
यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत 'समग्र शिक्षा अभियान 3.0' के पॉलिसी रिफॉर्म का हिस्सा है। केंद्र और राज्यों के मुख्य सचिवों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद इन संशोधनों को अंतिम रूप दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज को स्कूलों से जोड़ना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
नई गाइडलाइन के अनुसार, स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों के वेतन का जिम्मा तो सरकार के पास रहेगा, लेकिन स्कूल कैसे चलेगा, यह अभिभावक और स्थानीय प्रतिनिधि तय करेंगे।
निगरानी और सुझाव: यह कमेटी पढ़ाई के स्तर, खेलकूद, कौशल विकास, फीस और शिक्षकों की ट्रेनिंग पर अपने सुझाव देगी।
भागीदारी: कमेटी में अभिभावकों के अलावा स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
सरकार का लक्ष्य इस नई व्यवस्था के माध्यम से कई चुनौतियों का समाधान करना है:
ड्रॉपआउट दर में कमी: अभिभावकों की सक्रियता से छात्रों के स्कूल छोड़ने की समस्या को कम किया जाएगा।
परीक्षा का तनाव: कमेटी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा के दबाव को कम करने पर काम करेगी।
पोषण और शिक्षा: स्कूलों में मिल रहे पोषण (मिड-डे मील) और शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा नियंत्रण होगा।
एनरोलमेंट: 12वीं कक्षा तक शत-प्रतिशत एनरोलमेंट सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।
सरकार का मानना है कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज का स्कूलों से जुड़ना अनिवार्य है। छात्रों की जरूरतों के आधार पर समाज को स्कूलों से जोड़कर उनके समग्र विकास (Holistic Development) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
Location : New Delhi
Published : 6 May 2026, 6:44 AM IST