रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर का निधन, इंडस्ट्री में शोक की लहर

मशहूर फिल्म और टेलीविजन निर्माता प्रेम सागर का रविवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। जिन्होंने ‘अलिफ लैला’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिक और ‘हम तेरे आशिक हैं’ जैसी फिल्मों में काम किया। वह रामायण फेम निर्माता रामानंद सागर के बेटे थे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 31 August 2025, 5:07 PM IST
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Mumbai: प्रेम सागर खुद एक स्थापित निर्माता-निर्देशक थे, ने रविवार सुबह 10 बजे अंतिम सांस ली। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे और मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे। एक सूत्र के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें रविवार को घर ले जाने की सलाह दी थी, जहां उन्होंने अपने परिजनों की मौजूदगी में दुनिया को अलविदा कह दिया। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के जुहू स्थित पवनहंस श्मशान घाट में किया गया।

एफटीआईआई से ली तकनीकी शिक्षा

प्रेम सागर ने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से 1968 बैच में प्रशिक्षण लिया था। यहीं से उन्हें फोटोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी की गहरी समझ मिली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत तकनीकी विभाग में की और फिल्मों के कैमरा व इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में अहम योगदान दिया। उन्होंने 1968 की फिल्म 'आंखें', 1972 की 'ललकार', और 1976 की 'चरस' में बतौर सिनेमैटोग्राफर और तकनीकी विशेषज्ञ काम किया, जिसने उनकी तकनीकी कुशलता को इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।

पिता के साथ सागर आर्ट्स में लंबा कार्यकाल

प्रेम सागर ने 'सागर आर्ट्स' प्रोडक्शन हाउस में लंबे समय तक काम किया, जिसे उनके पिता रामानंद सागर ने स्थापित किया था। यह वही प्रोडक्शन हाउस है जिसने भारत की पहली और सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक टीवी सीरीज ‘रामायण’ को बनाया था, जिसका प्रसारण 1987 में दूरदर्शन पर हुआ। प्रेम सागर ने इस बैनर के तहत स्टिल फोटोग्राफर और सिनेमेटोग्राफर के रूप में कई प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया और धीरे-धीरे प्रोडक्शन की जिम्मेदारियों को भी संभालना शुरू किया।

‘अलिफ लैला’ से मिली निर्देशन में पहचान

टीवी सीरीज ‘अलिफ लैला’ के निर्देशन के बाद प्रेम सागर को भारतीय टेलीविजन में एक सफल निर्देशक के रूप में पहचाना जाने लगा। यह धारावाहिक भी सागर आर्ट्स के बैनर तले बना और 90 के दशक में बेहद लोकप्रिय हुआ। इसकी कहानियां और प्रस्तुतिकरण बच्चों और परिवारों के बीच काफी सराही गईं। बाद में उन्होंने और भी धार्मिक और पौराणिक विषयों पर आधारित प्रोजेक्ट्स का निर्माण किया, जिनमें हालिया प्रोजेक्ट्स ‘काकभुशुंडी रामायण’ (2024) और ‘कामधेनु गौमाता’ (2025) प्रमुख हैं।

फिल्म प्रोड्यूसर के रूप में भी रहा योगदान

• ‘हम तेरे आशिक हैं’ (1979)
• ‘बसेरा’ (2009)
• ‘जय जय शिव शंकर’ (2010)

धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी रही सोच

प्रेम सागर की पहचान केवल एक निर्माता-निर्देशक के रूप में नहीं थी, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धर्म से गहराई से जुड़े व्यक्ति थे। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में अधिकांश प्रोजेक्ट्स धार्मिक और पौराणिक विषयों पर केंद्रित किए। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना था। उनके प्रोजेक्ट्स में संस्कार, भक्ति और नैतिक मूल्यों का स्पष्ट प्रतिबिंब देखने को मिलता है।

 

Location : 
  • Mumbai

Published : 
  • 31 August 2025, 5:07 PM IST

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