निवास सत्यापन के बहाने पर भड़के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव, जानिए क्यों HC ने जेल प्रशासन के रवैए को बताया बड़ा मजाक

दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालती आदेश का पालन न करने पर तिहाड़ जेल के अधीक्षक डॉ. पवन कुमार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 17 September 2026, 12:11 PM IST
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New Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर तिहाड़ जेल की सेंट्रल जेल नंबर 2 के सुपरिटेंडेंट डॉ. पवन कुमार के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की है। जेल प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने इस व्यवहार को न्यायिक व्यवस्था की अनदेखी बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार कानूनी ढांचे को कमजोर करता है।

पैरोल के आदेश के बावजूद कैदी को रिहा नहीं किया गया

यह मामला अनवर हुसैन नाम के एक विचाराधीन कैदी से जुड़ा है, जो लगभग पांच साल और पांच महीने से जेल में बंद है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 अगस्त को उसे पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। हालांकि कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जेल प्रशासन ने कैदी को रिहा नहीं किया। जेल सुपरिटेंडेंट ने तर्क दिया कि कैदी के निवास स्थान का सत्यापन पूरा नहीं हुआ था, जिससे रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी; प्रशासन ने इसे मानक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

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अतिरिक्त शर्त लगाने पर कोर्ट ने सवाल उठाए

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अध्यक्षता वाली बेंच ने जेल प्रशासन के तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 11 अगस्त के आदेश में कैदी की रिहाई के लिए निवास सत्यापन जैसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी। बेंच ने टिप्पणी की कि अपनी मर्जी से एक अतिरिक्त शर्त जोड़कर, जेल सुपरिटेंडेंट ने कोर्ट के निर्देश को निष्प्रभावी करने की कोशिश की। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और इसे न्यायिक आदेश की अवहेलना माना।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर जोर

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जोर दिया कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में कोर्ट के आदेशों का पालन सर्वोपरि है। कोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारी के व्यवहार से संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठता है।

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22 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश

जेल सुपरिटेंडेंट डॉ. पवन कुमार ने कोर्ट द्वारा जारी अवमानना ​​नोटिस को स्वीकार कर लिया है। हाई कोर्ट ने उन्हें 22 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जेल सुपरिटेंडेंट को लिखित जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है जिसमें यह बताया जाए कि 'न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971' के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

Location :  New Delhi

Published :  17 September 2026, 12:11 PM IST

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