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कश्मीरी पंडितों को यूएलसी की नई धमकी (Img- Pinterest)
Srinagar: घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत सेवाएं दे रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों पर एक बार फिर जान का खतरा मंडराने लगा है। शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक और सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे इन कर्मचारियों की तस्वीरें अब आतंकी पोस्टरों पर छप रही हैं।
आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) ने पिछले 40 दिनों के भीतर अपना छठा धमकी भरा पत्र जारी कर घाटी में काम कर रहे पंडितों को 'व्हाइट कॉलर आतंकी' करार दिया है। इस धमकी के बाद से पूरे समुदाय में दहशत का माहौल है और उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर महीने के अंत तक हालात नहीं सुधरे, तो वे सामूहिक रूप से घाटी से पलायन कर जाएंगे।
बुधवार को श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में अपनी सुरक्षा और सुरक्षित आवास की मांग को लेकर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने एक मौन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर यूएलसी द्वारा जारी नए पत्र में इसी प्रदर्शन की तस्वीरें छपी मिलीं।
पत्र पर एके-47 राइफल के ग्राफिक के साथ प्रदर्शनकारियों के चेहरों को उजागर किया गया है। आतंकियों ने इन कर्मचारियों के ट्रांजिट कैंपों की तुलना इजराइली मॉडल की बस्तियों से करते हुए धमकी दी है कि उन्हें देश का गृह मंत्रालय भी सुरक्षा नहीं दे पाएगा।
धमकी भरे पत्र में 'सोल्जर ऑफ रेजिस्टेंस' के मीडिया कॉर्डिनेटर अहमद बिलाल के दस्तखत हैं। पत्र में दावा किया गया है कि आतंकियों के पास कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते, लाइव लोकेशन और उनके परिवारों की पूरी जानकारी मौजूद है। इस दावे ने प्रशासनिक तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि राहत आयुक्त कार्यालय और शिक्षा विभाग से उनकी बेहद संवेदनशील और निजी जानकारियां आतंकियों तक कैसे पहुंचीं? इस डेटा लीक ने कर्मचारियों के मन में सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक सुरक्षा घेरे के प्रति गहरे अविश्वास को जन्म दे दिया है।
आतंकी खतरों और डेटा लीक से घबराए छह हजार से अधिक पीएम पैकेज कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश हांडू के माध्यम से कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है।
कर्मचारियों ने प्रशासन को 30 सितंबर तक का समय दिया है। यदि इस अवधि के भीतर उन्हें सुरक्षित आवास और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था नहीं दी गई, तो वे 1 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे और सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर घाटी छोड़ने के लिए मजबूर होंगे।
दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और आवास को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि घाटी में कोई भी कश्मीरी पंडित कर्मचारी बेघर नहीं है और कुछ लोगों द्वारा भ्रामक स्थिति पैदा की जा रही है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि जहां भी कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था की गई है, वे पूरी तरह से उनके लिए ही हैं। जो कर्मचारी अभी प्रतीक्षा सूची में हैं, उनके लिए नए सुरक्षित ट्रांजिट आवासों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और चरणबद्ध तरीके से सभी को मकान आवंटित कर दिए जाएंगे।
Location : Srinagar
Published : 11 September 2026, 9:35 AM IST