CNG गाड़ी वालों के लिए बड़ी खबर: बिना इस कागज के नहीं मिलेगी गैस, IGL ने दिल्ली-NCR में बदले नियम

दिल्ली-NCR में IGL का बड़ा फैसला! अब बिना वैध हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट के किसी भी वाहन में CNG नहीं भरी जाएगी। जानिए क्या है 3 साल वाला नियम, PESO की गाइडलाइन्स और पंप पर खाली हाथ लौटने से बचने के लिए तुरंत क्या करें।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 11 September 2026, 8:24 AM IST
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New Delhi: दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर सीएनजी गाड़ियों से सफर करने वालों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने वाहनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक सख्त अभियान की शुरुआत की है।

अब दिल्ली-एनसीआर के किसी भी सीएनजी स्टेशन पर गैस भरवाने के लिए 'हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट' दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि आपके पास यह वैध प्रमाण पत्र नहीं होगा, तो पंप कर्मचारी गाड़ी में गैस भरने से साफ इनकार कर देंगे। यह कदम हाल ही में सीएनजी सिलेंडर में हुए हादसे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के लिए उठाया गया है।

हादसे के बाद जागा प्रशासन, PESO का सख्त निर्देश

दरअसल, पिछले महीने दिल्ली के एक फ्यूल स्टेशन पर सीएनजी सिलेंडर फटने से एक गंभीर दुर्घटना हुई थी। इस घटना के बाद पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया और सुरक्षा नियमों का पालन कराने के कड़े निर्देश दिए।

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इसी आदेश पर अमल करते हुए IGL ने अपने सभी पंपों पर कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गैस नोजल लगाने से पहले वाहन के हाइड्रो-टेस्ट की वैधता और कंप्लायंस प्लेट की गहनता से जांच करें।

क्या है 3 साल का कानूनी नियम और टेस्टिंग प्रक्रिया?

गैस सिलेंडर नियम 2025 के नियम 35(1) के मुताबिक, देश में चलने वाले हर सीएनजी सिलेंडर का हर तीन साल में कम से कम एक बार हाइड्रो-टेस्ट होना कानूनी रूप से जरूरी है। यह टेस्ट केवल PESO से मान्यता प्राप्त अधिकृत टेस्टिंग केंद्रों पर ही कराया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान सिलेंडर से गैस खाली करके उसमें पानी भरा जाता है और अत्यधिक उच्च दबाव पर सिलेंडर की क्षमता, लीकेज और अंदरूनी दरारों को जांचा जाता है।

200 बार का दबाव और अनदेखा खतरा

सीएनजी गाड़ियों में गैस लगभग 200 से 250 बार के भारी दबाव (High Pressure) पर स्टोर की जाती है। रोजाना गाड़ी चलने, सड़क के झटकों और मौसम के बदलाव की वजह से सिलेंडर के भीतर मेटल की कमजोरी या अंदरूनी नुकसान हो सकता है, जो बाहर से नजर नहीं आता। अगर समय पर टेस्टिंग न कराई जाए, तो यह सिलेंडर चलती गाड़ी या रिफिलिंग के समय एक बड़े खतरे का रूप ले सकता है। हाइड्रो-टेस्ट इसी अनदेखे जोखिम को दूर करने का एकमात्र जरिया है।

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पंप जाने से पहले करें ये 3 काम

अगर आप सीएनजी वाहन चलाते हैं, तो किसी भी परेशानी से बचने के लिए तुरंत अपने सिलेंडर पर लगी कंप्लायंस प्लेट और हाइड्रो-टेस्ट की तारीख चेक करें। गाड़ी में हमेशा वैध हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट की कॉपी रखें ताकि पंप पर मांगने पर दिखा सकें। यदि आपकी सीएनजी किट को 3 साल या उससे ज्यादा का समय हो चुका है, तो बिना देर किए अपने नजदीकी PESO ऑथराइज्ड सेंटर से सिलेंडर की जांच करवाएं।

Location :  New Delhi

Published :  11 September 2026, 8:24 AM IST

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