Kalanemi: क्या है कालनेमि का अर्थ? जानें क्यों सोशल मीडिया पर कर रहा ट्रेंड?

कालनेमि रामायण का एक राक्षस ही नहीं, बल्कि छल और पाखंड का प्रतीक है। आज के समय में ‘कालनेमि’ शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए किया जा रहा है, जो धर्म के वेश में समाज को गुमराह करते हैं। सीएम योगी के बयान के बाद यह शब्द फिर चर्चा में है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 23 January 2026, 11:23 AM IST
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New Delhi: हाल ही में ‘कालनेमि’ शब्द अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। प्रयागराज के माघ मेले और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक मंच से इस शब्द का प्रयोग किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग धर्म का चोला ओढ़कर सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं और ऐसे लोगों से समाज को सावधान रहने की जरूरत है। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं, आखिर यह ‘कालनेमि’ है कौन और इसका अर्थ क्या है?

‘कालनेमि’ केवल एक पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि एक प्रतीक (Symbol) है। संस्कृत और धार्मिक संदर्भों में कालनेमि का अर्थ है, “जो जैसा नहीं है, वैसा दिखने का प्रयास करे।” आज के संदर्भ में, कालनेमि उस व्यक्ति या समूह का प्रतीक बन गया है, जो बाहर से धर्म, नैतिकता या साधुता का दिखावा करे, लेकिन अंदर से उसका उद्देश्य बिल्कुल उलटा हो।

क्या है कालनेमि शब्द का अर्थ?

कालनेमि शब्द संस्कृत से निकला है, जहां 'काल' का अर्थ समय या काला (अंधकार) है, और 'नेमि' का मतलब पहिए का किनारा या हिस्सा। इसका शाब्दिक अर्थ 'समय के पहिए का किनारा' है, जो समय की चक्रीय प्रकृति और अंधकार की ओर बढ़ते हुए द्वापर से कलियुग की ओर संकेत करता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में यह नाम छल, माया और धोखे का प्रतीक बन गया है। उदाहरण के लिए, रामायण में कालनेमि साधु का वेश धारकर हनुमान को धोखा देता है, जो बाहरी रूप से पवित्र लेकिन अंदर से दुष्ट होने का उदाहरण है।

The story of the illusionist demon Kalnemi

मायावी राक्षस कालनेमि की कहानी

क्या है मायावी राक्षस कालनेमि की कहानी?

रामायण के विभिन्न संस्करणों में कालनेमि को एक शक्तिशाली राक्षस बताया गया है। वह मारीच का पुत्र था, जो रावण का मामा था, इसलिए कालनेमि रावण का चचेरा भाई या निकट संबंधी माना जाता है। लंका की सेना में वह एक प्रमुख योद्धा था, जो न केवल बलशाली बल्कि छल-कपट में माहिर था। रावण की सेवा में रहकर वह उसके आदेशों का पालन करता था। पुराणों में उसकी वंशावली और भी गहरी है; कुछ कथाओं में वह विरोचन का पुत्र और प्रह्लाद का पौत्र है, जो असुर वंश से जुड़ा है। विष्णु ने उसे तरकामय युद्ध में मारा था, और विभिन्न जन्मों में वह कंस के रूप में पुनर्जन्म लेता है।

रामायण में कालनेमि का जिक्र

रामायण में उसकी मुख्य भूमिका लक्ष्मण की रक्षा से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद ने लक्ष्मण पर शक्ति का प्रहार किया, जिससे वह अचेत हो गए। सुशेन वैद्य ने बताया कि द्रोण पर्वत से सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी लानी होगी, वरना लक्ष्मण की मृत्यु हो जाएगी। जिसके बाद, भगवान राम के आदेश पर हनुमान आकाश मार्ग से द्रोण पर्वत की ओर निकले। रावण को यह खबर मिली तो उसने कालनेमि को हनुमान को रोकने का आदेश दिया।

जब हनुमान के सामने खुला कालनेमि का भेद

कालनेमि ने माया से एक सुंदर आश्रम और शांत सरोवर रचा। वह स्वयं साधु का वेश धारण कर बैठ गया। हनुमान को थकान और प्यास लगी तो वह आश्रम में रुके। साधु बने कालनेमि ने उन्हें स्नान और विश्राम के लिए आमंत्रित किया और कहा कि स्नान के बाद विशेष ज्ञान देंगे। हनुमान सरोवर में स्नान करने उतरे तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। हनुमान ने उसे मार गिराया, तो वह अप्सरा में बदल गई।

अप्सरा ने बताया कि वह दक्ष ऋषि के श्राप से मगरमच्छ बनी थी और हनुमान जी द्वारा मुक्त हुई। उसने कालनेमि की साजिश बताते हुए कहा कि वह लक्ष्मण तक बूटी पहुंचने में देरी करना चाहता था। अप्सरा ने कहा कि यह साधु नहीं, रावण का दूत कालनेमि है। रहस्य खुलने पर कालनेमि ने अपना असली रूप दिखाया और युद्ध किया, लेकिन हनुमान ने एक ही प्रहार से उसे मार गिराया। यह घटना उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के विजेथुआ तीर्थ पर हुई, जो अयोध्या से 100 किमी दूर है। ब्रिटिश गजेटियर में इसे अयोध्या के बाद दूसरा प्रमुख हिंदू स्थल बताया गया है, जहां पवित्र कुंड आज भी मौजूद है। पुराणों में कालनेमि विष्णु से जुड़ा है, जो विभिन्न जन्मों में पुनर्जन्म लेता है, जैसे कंस बनकर।

पहले भी हो चुका है कालनेमि का जिक्र

बता दें कि पहले भी कालनेमि का जिक्र हो चुका है। बीते वर्ष 2025 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑपरेशन कालनेमि लांच किया था। यह ऑपरेशन कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू की गई थी, ये एक ऐसा अभियान था जो कि धार्मिक आस्था की आड़ में ठगी और अपराध करने वालों के खिलाफ चलाया गया। इसमें कई लोग गिरफ्तार हुए, जिसमें फर्जी बाबा और विदेशी शामिल थे।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 23 January 2026, 11:23 AM IST

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