दुनिया में कहीं 2018 तो कहीं 2083! साल 2026 में भी अलग-अलग समय में जी रहे ये देश

दुनिया के अधिकांश देशों ने ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 का स्वागत कर लिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां अभी साल 2026 नहीं चल रहा? कहीं लोग 2018 में जी रहे हैं तो कहीं 2083...

Updated : 16 June 2026, 2:49 PM IST
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नई दिल्ली: दुनिया के अधिकांश देशों ने ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 का स्वागत कर लिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां अभी साल 2026 नहीं चल रहा? कहीं लोग 2018 में जी रहे हैं तो कहीं 2083 का कैलेंडर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी वजह सिर्फ समय क्षेत्र (Time Zone) नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराएं हैं।

दुनिया के कई देशों ने आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए ग्रेगोरियन कैलेंडर अपना लिया, लेकिन अपनी पारंपरिक पहचान बनाए रखने के लिए आज भी अलग कैलेंडरों का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग साल दर्ज किए जाते हैं।

इथियोपिया- दुनिया से 7-8 साल पीछे

अफ्रीकी देश इथियोपिया में आज भी इथियोपियन कैलेंडर का उपयोग किया जाता है। जून 2026 में यहां वर्ष 2018 चल रहा है। इस कैलेंडर में 13 महीने होते हैं और नया साल सितंबर में शुरू होता है। यीशु मसीह के जन्म वर्ष की अलग गणना के कारण यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से कई साल पीछे है।

नेपाल- जहां चल रहा है 2083

भारत का पड़ोसी देश नेपाल आधिकारिक तौर पर विक्रम संवत कैलेंडर का उपयोग करता है। जून 2026 में नेपाल में वर्ष 2083 चल रहा है। यह कैलेंडर ग्रेगोरियन प्रणाली से लगभग 57 वर्ष आगे माना जाता है। सरकारी दस्तावेजों, छुट्टियों और प्रशासनिक कार्यों में इसी कैलेंडर का प्रयोग किया जाता है।

ईरान और अफगानिस्तान- 1405 का साल

ईरान और अफगानिस्तान में सोलर हिजरी कैलेंडर लागू है। यहां जून 2026 में वर्ष 1405 चल रहा है। यह कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित है और नवरोज के साथ नए साल की शुरुआत होती है। इसे दुनिया के सबसे सटीक सौर कैलेंडरों में से एक माना जाता है।

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भूटान और अन्य देशों की परंपरा

भूटान में सरकारी कामकाज के लिए ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल होता है, लेकिन पारंपरिक बौद्ध कैलेंडर और चीनी राशि चक्र का भी विशेष महत्व है। इसके अलावा कई देशों में इस्लामिक हिजरी, यहूदी और चीनी कैलेंडर धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों में उपयोग किए जाते हैं।

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आखिर क्यों होता है सालों का अंतर?

विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग कैलेंडरों की शुरुआत विभिन्न धार्मिक घटनाओं, राजाओं के शासनकाल और ऐतिहासिक युगों से जुड़ी है। कुछ कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित हैं तो कुछ चंद्रमा की चाल पर। यही वजह है कि उनकी गणना ग्रेगोरियन कैलेंडर से अलग होती है।

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पर्यटकों के लिए अनोखा अनुभव

इथियोपिया पहुंचने वाले पर्यटकों को अक्सर ऐसा महसूस होता है जैसे वे समय में पीछे चले गए हों। वहीं नेपाल में दुकानों और सरकारी दफ्तरों पर 2083 लिखा देख लोग हैरान रह जाते हैं। ये कैलेंडर न केवल समय की गणना करते हैं, बल्कि देशों की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को भी जीवित रखते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  16 June 2026, 2:49 PM IST

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