महिलाओं और ट्रांसजेंडरों की किस्मत बदलने आ रही ‘दुर्गा’ योजना, क्या आप भी उठा सकते हैं इसका फायदा?

दिल्ली सरकार जल्द ही 'दुर्गा' योजना शुरू कर रही है। इसके तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1100 गुलाबी ई-ऑटो परमिट दिए जाएंगे। आवेदन के लिए उम्र 20 से 40 वर्ष और परिवार की वार्षिक आय पांच लाख रुपये तक रखने का प्रस्ताव है।

Updated : 16 June 2026, 12:46 PM IST
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New Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी में महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय को रोजगार से जोड़ने तथा परिवहन क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए एक बेहद खास पहल की है। सरकार जल्द ही 'दुर्गा' योजना शुरू करने जा रही है, जिसके तहत दिल्ली में 1100 इलेक्ट्रिक ऑटो (ई-ऑटो) के परमिट जारी किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक नई व सम्मानजनक पहचान दिलाना है।

क्या है 'दुर्गा' योजना और इसका उद्देश्य?

इस विशेष योजना का पूरा नाम ‘ड्राइविंग अपलिफ्टमेंट एंड रोजगार फॉर वुमेन, ट्रांसजेंडर ग्रीन ई-ऑटो’ (DURGA) है। इसके तहत जारी होने वाले कुल 1100 परमिटों में से 1000 परमिट महिला चालकों के लिए और 100 परमिट ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षित रखे गए हैं। योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने विशेष तैयारियां की हैं। इसके तहत सड़कों पर दौड़ने वाले सभी ई-ऑटो आकर्षक गुलाबी रंग के होंगे। इसके साथ ही, महिला और ट्रांसजेंडर चालक सेवाएं देते समय एक विशेष पहचान पत्र, जैकेट और कैप (टोपी) धारण करेंगी, जिससे उन्हें एक अलग और पेशेवर पहचान मिलेगी।

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आवेदन के लिए जरूरी पात्रता और शर्तें

सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी नियम और पात्रता शर्तें तय की हैं, जो इस प्रकार हैं-

आयु सीमा: आवेदक की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

पारिवारिक आय: आवेदक के परिवार की वार्षिक आय अधिकतम पांच लाख रुपये तक होनी चाहिए।

वाहन की शर्त: परिवार के पास पहले से कोई भी व्यावसायिक तिपहिया वाहन (कमर्शियल ऑटो) नहीं होना चाहिए।

एक परिवार से एक लाभ: योजना के नियमानुसार, एक परिवार से केवल एक ही महिला इस परमिट के लिए आवेदन कर सकती है।

बच्चों की आयु: विवाहित महिला आवेदकों के बच्चों की आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।

सुरक्षा, ट्रेनिंग और बुनियादी सुविधाओं के इंतजाम

इस योजना को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने कई विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है। चालकों और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी ई-ऑटो पर महिला हेल्पलाइन नंबर और आपातकालीन संपर्क नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे।

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इसके अलावा, समाज कल्याण विभाग सभी चयनित लाभार्थियों को ड्राइविंग सिखाने के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और ग्राहक व्यवहार (कस्टमर बिहेवियर) का विशेष प्रशिक्षण देगा। बुनियादी ढांचे की बात करें तो, दिल्ली मेट्रो (DMRC), एनसीआरटीसी (NCRTC) और रैपिड रेल स्टेशन क्षेत्रों में इन ई-ऑटोज के लिए चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जबकि नगर निगम (MCD) इनके लिए पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

दुरुपयोग रोकने के लिए तीन साल का 'लॉक-इन' पीरियड

योजना का लाभ सही और जरूरतमंद लोगों तक ही सीमित रहे और इसका कोई दुरुपयोग न हो, इसके लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। इस योजना में तीन वर्ष की 'लॉक-इन' अवधि रखी गई है। इसका मतलब है कि परमिट मिलने के बाद शुरुआती तीन सालों तक इस वाहन को किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर हस्तांतरित (ट्रांसफर) नहीं किया जा सकेगा। तीन साल की अवधि बीत जाने के बाद भी, इस ई-ऑटो को केवल किसी अन्य महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ही हस्तांतरित करने की अनुमति होगी।

Location :  New Delhi

Published :  16 June 2026, 12:46 PM IST

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