27 अक्टूबर 2025 को उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी, उस समय राज्य में कुल 15.44 करोड़ रजिस्टर्ड मतदाता दर्ज थे। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया और आवश्यक फॉर्म वितरित किए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार कुल 12.55 करोड़ फॉर्म, यानी लगभग 81 प्रतिशत, वापस प्राप्त हुए, जबकि 18.7 प्रतिशत फॉर्म वापस नहीं मिले। आयोग के मुताबिक जिन मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हो पाए, उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जिसके चलते कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नामों की कटौती की गई।
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