भारत-EU FTA: यूरोप में सस्ती होंगी भारतीय कारें, 5वें साल से Zero Duty का रास्ता

भारत-EU FTA से भारतीय कारों के लिए यूरोपीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है। पहले साल 2.5 लाख कारों को 8 प्रतिशत रियायती शुल्क पर एंट्री मिलेगी। शुल्क चौथे साल 2 प्रतिशत और पांचवें साल शून्य हो सकता है। 10वें साल कारों का कोटा बढ़कर 4 लाख सालाना होगा।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 14 September 2026, 9:21 AM IST
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New Delhi: भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। समझौते के मसौदे के मुताबिक भारतीय कारों को यूरोपीय बाजार में कम शुल्क पर एंट्री मिलेगी। खास बात यह है कि पात्र कारों पर शुल्क धीरे-धीरे घटते हुए पांचवें साल से शून्य हो जाएगा।

पहले साल 2.5 लाख कारों को फायदा

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पहले साल भारत में बनी 2.5 लाख यात्री कारों को यूरोपीय संघ के बाजार में 8 प्रतिशत रियायती शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। यह सुविधा भारतीय मूल की ICE कारों और Hybrid Electric Vehicles यानी HEV के लिए होगी।

इसके लिए कार की CIF कीमत 50 हजार यूरो तक होनी चाहिए। CIF कीमत में वाहन की कीमत के अलावा यूरोप के बंदरगाह तक माल ढुलाई और बीमा खर्च भी शामिल होता है।

पांचवें साल खत्म हो जाएगा शुल्क

भारतीय कारों पर मिलने वाली यह रियायत एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। पहले साल शुल्क 8 प्रतिशत, दूसरे साल 6 प्रतिशत, तीसरे साल 4 प्रतिशत और चौथे साल 2 प्रतिशत रहेगा। इसके बाद पांचवें साल से पात्र कारों पर आयात शुल्क शून्य हो जाएगा।

यानी भारतीय वाहन कंपनियों को यूरोप में अपनी कारें बेचने के लिए धीरे-धीरे बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच बड़ा लागत लाभ मिल सकता है।

10वें साल 4 लाख कारों का कोटा

कारों की संख्या का कोटा भी समय के साथ बढ़ाया जाएगा। पहले साल 2.5 लाख वाहनों से शुरुआत होगी और 10वें साल से यह संख्या बढ़कर 4 लाख वाहन सालाना हो जाएगी।

हालांकि तय कोटे से अधिक वाहनों पर सामान्य MFN यानी Most Favoured Nation शुल्क लागू होगा। वहीं 50 हजार यूरो से अधिक CIF कीमत वाली कारों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। इन पर भी शुल्क पहले साल 8 प्रतिशत से शुरू होकर 10वें साल शून्य किया जाएगा।

EV कारों के लिए भी अलग रास्ता

Battery Electric Vehicles यानी BEV, Plug-in Hybrid Electric Vehicles यानी PHEV और कुछ अन्य तकनीक वाली कारों के लिए भी अलग टैरिफ कोटा प्रस्तावित है। 40 हजार यूरो तक की CIF कीमत वाली कारों के लिए पांचवें साल से 27,500 वाहनों का कोटा होगा, जो आगे बढ़कर 14वें साल 1.25 लाख वाहन सालाना हो सकता है।

40 हजार से 60 हजार यूरो तक और 60 हजार यूरो से अधिक कीमत वाली कारों के लिए भी अलग-अलग कोटा निर्धारित किया गया है।

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सिर्फ कारों तक सीमित नहीं रहेगा फायदा

प्रस्तावित FTA का असर ऑटो सेक्टर से आगे भी जा सकता है। कुछ भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसे टेबल अंगूर, सूखे प्याज, खीरा-घेरकिन, रम और घी को भी यूरोपीय बाजार में शुल्क रियायत का लाभ मिलने का प्रावधान है।

भारत को क्या फायदा होगा?

कम आयात शुल्क से भारतीय वाहन कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान हो सकता है। इससे निर्यात बढ़ने, उत्पादन में तेजी आने और भारतीय ऑटो उद्योग को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति बनाने का मौका मिल सकता है। खासकर पांचवें साल से शून्य शुल्क की व्यवस्था भारतीय कारों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  14 September 2026, 9:21 AM IST

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