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Sustainability Strategist पूर्वा अवस्थी (Img: Dynamite News)
New Delhi: होटल इंडस्ट्री को लेकर पर्यावरण नियमों के तहत लागू की गई एक वर्गीकरण व्यवस्था लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। सवाल यह है कि क्या पर्यावरण का ध्यान रखने वाले होटल और केमिकल फैक्ट्रियों या टेनरियों जैसे प्रदूषणकारी उद्योगों को एक ही श्रेणी में रखना सही है? Red Category में होटलों को शामिल किए जाने से होटल कारोबार पर अतिरिक्त नियमों और अनुपालन का बोझ बढ़ने की बात सामने आई है।
पर्यावरण संबंधी नियमों के तहत उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है। Red Category में आमतौर पर अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग शामिल होते हैं। इनमें टेनरी और केमिकल फैक्ट्रियां जैसे उद्योग आते हैं।
होटल कारोबार में कई ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जो पानी की बचत, ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को अपनाते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें अधिक प्रदूषणकारी उद्योगों के समान नियमों का सामना करना पड़े, तो उनके संचालन की लागत और प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।
ऐसे में होटल इंडस्ट्री की मांग है कि वर्गीकरण करते समय केवल उद्योग के नाम के बजाय उसके वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव और प्रदूषण स्तर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
Sustainability Strategist पूर्वा अवस्थी ने इस मुद्दे के जरिए होटल इंडस्ट्री के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान खींचा है। उनका वीडियो इस सवाल को सामने रखता है कि क्या पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होटल प्रतिष्ठानों पर भी उसी तरह की सख्ती लागू होनी चाहिए, जैसी टेनरी और केमिकल फैक्ट्रियों पर होती है?
होटल इंडस्ट्री के लिए यह मुद्दा केवल नियमों का नहीं, बल्कि कारोबार को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और उचित नियमन के बीच संतुलन का भी है। जरूरी है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अलग-अलग उद्योगों की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर नियम तय किए जाएं।
Location : New Delhi
Published : 4 November 2026, 8:59 AM IST