आखिर क्यों ‘अर्थी’ बनकर पानी में लेट गए सैकड़ों लोग? छतरपुर की यह तस्वीर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत कई विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का 'चिता आंदोलन' सुर्खियों में है। आंदोलनकारी खुद चिता का प्रतीक बनकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 11 दिनों से भूख हड़ताल जारी है और उचित मुआवजा, पुनर्वास व कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की जा रही है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 17 July 2026, 6:13 PM IST
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Chhatarpur: जब भी सरकार तक अपनी बात पहुंचानी होती है, लोग धरना देते हैं, प्रदर्शन करते हैं या भूख हड़ताल पर बैठते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के छतरपुर से सामने आई तस्वीरें हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। यहां लोग लकड़ियों की चिता पर नहीं लेटे हैं, बल्कि खुद चिता का प्रतीकात्मक रूप बनाकर जमीन पर लेटकर विरोध जता रहे हैं। यही वजह है कि इस अनोखे प्रदर्शन को 'चिता आंदोलन' नाम दिया गया है। सोशल मीडिया पर इस आंदोलन की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि लोगों को यह तरीका अपनाना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना, एनटीपीसी, मझगांव, रूंज और नैगुवा जैसी विकास परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवार पिछले कई वर्षों से उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीनें चली गईं, लेकिन बदले में न तो उन्हें उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई।

11वें दिन भी जारी भूख हड़ताल

'जय किसान संगठन' के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे हैं। वह लगातार 11 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि इस दौरान उनका करीब छह किलोग्राम वजन कम हो चुका है और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।

500 घरों में नहीं जला चूल्हा

आंदोलन के समर्थन में प्रभावित परिवारों ने भी अनोखा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, करीब 500 परिवारों ने अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाया, जिसके कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी पूरे दिन बिना भोजन के रहे। उनका कहना है कि यह सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का शांतिपूर्ण प्रयास है।

क्या हैं आंदोलनकारियों के आरोप?

प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों से वे अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है कि ग्राम सभाएं नियमानुसार नहीं कराई गईं, पारदर्शी सर्वे नहीं हुआ और जनसुनवाई में उठाई गई आपत्तियों का भी समाधान नहीं किया गया।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित हुई, उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को कथित रूप से बड़ी रकम का भुगतान कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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ये हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

आंदोलनकारी प्रत्येक प्रभावित परिवार को तीन एकड़ जमीन, वर्ष 2026 तक पात्रता की कट-ऑफ तिथि बढ़ाने, मुआवजा और पुनर्वास प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच तथा केन-बेतवा लिंक परियोजना के फायदे और नुकसान पर सार्वजनिक चर्चा की मांग कर रहे हैं।

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मिल रहा राजनीतिक और सामाजिक समर्थन

आंदोलन को समाजवादी पार्टी समेत कई सामाजिक संगठनों और गांधीवादी विचारकों का समर्थन मिला है। विभिन्न नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंदोलन स्थल पहुंचकर विस्थापितों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका 'चिता आंदोलन' जारी रहेगा।

Location :  Chhatarpur

Published :  17 July 2026, 6:13 PM IST

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