Assam Assembly Election: वोटिंग से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका, इस सांसद ने दिया इस्तीफा, जानें आखिर कौन है वो?

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सांसद और बड़े नेता के इस्तीफे ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। टिकट वितरण और नेतृत्व के फैसलों को लेकर विवाद तेज हो गया है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 18 March 2026, 8:38 AM IST
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Dispur: असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य की सियासत को अचानक गरमा दिया है और चुनावी माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है।

इस्तीफे में जताया दुख

प्रद्युत बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि वह बहुत दुख के साथ पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने पार्टी को शुभकामनाएं देते हुए अपने सियासी सफर के इस अध्याय को समाप्त करने की बात कही।

तरुण गोगोई के करीबी रहे हैं बोरदोलोई

बोरदोलोई, असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं। उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है और कांग्रेस के मजबूत नेताओं में उनकी गिनती होती रही है।

डिब्रूगढ़ से दो बार सांसद

प्रद्युत बोरदोलोई असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। डिब्रूगढ़ क्षेत्र औद्योगिक और चाय उत्पादन के लिए जाना जाता है और यहां भाजपा की मजबूत पकड़ मानी जाती है।

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भाजपा में शामिल होने की अटकलें

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बोरदोलोई के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि वह जल्द ही भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं और असम इकाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस्तीफे के पीछे क्या वजह?

पिछले कुछ वर्षों में असम में कांग्रेस के लगातार कमजोर प्रदर्शन से कई नेताओं में असंतोष बढ़ा है। 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ 29 सीटों पर सिमट गई थी। बोरदोलोई ने भी पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों पर असहमति जताई थी। बदलते राजनीतिक माहौल और भाजपा की बढ़ती ताकत को भी उनके फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

असम में भाजपा की मजबूत स्थिति

भाजपा 2016 से लगातार असम की सत्ता में बनी हुई है। 2024 लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने 14 में से 9 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। ऐसे में बोरदोलोई जैसे नेता का भाजपा में जाना पार्टी को और मजबूती दे सकता है।

चुनाव की तारीख और अहमियत

असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में चुनाव से पहले यह सियासी घटनाक्रम कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती

कुल मिलाकर, प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा कांग्रेस के लिए सिर्फ एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि संगठनात्मक कमजोरी का संकेत भी है। पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने नेताओं को एकजुट रखे और चुनाव से पहले अपनी स्थिति को मजबूत बनाए।

Location : 
  • Dispur

Published : 
  • 18 March 2026, 8:38 AM IST

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