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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में प्लेन क्रैश में निधन। 37 साल की राजनीतिक यात्रा, एनसीपी और सहकारी आंदोलन में योगदान, परिवार और वित्तीय विरासत चर्चा में। उनके पारिवारिक और राजनीतिक जीवन ने महाराष्ट्र की राजनीति को गहराई दी।
डिप्टी सीएम अजित पवार का परिवार
Mumbai: महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार, 28 जनवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन क्रैश में निधन हो गया। वह जिले में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव प्रचार के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने जा रहे थे। इस दुर्घटना ने राज्य और देश भर में राजनीतिक हलचल मचा दी।
अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे। वह एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे थे। पिछले साल उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला था।
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के राहुरी तालुका के देवलाली प्रवारा में हुआ। उन्होंने बारामती और देवलाली में प्राथमिक और उच्च शिक्षा पूरी की। उन्होंने बीकॉम की डिग्री शिवाजी यूनिवर्सिटी से हासिल की। हालांकि उनके पिता अनंतराव पवार का बॉलीवुड कनेक्शन था, उन्होंने राजनीतिक मार्ग चुना।
अजित पवार, जिन्हें लोग ‘दादा’ कहते थे, महत्वाकांक्षी और सीधे बोलने वाले नेता थे। उनकी नजर हमेशा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर रही। 2009 के विधानसभा चुनावों के बाद उपमुख्यमंत्री न बनाए जाने से नाराज हुए, लेकिन दिसंबर 2010 में छगन भुजबल की जगह उन्होंने यह पद संभाला। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की आलोचना भी की।
अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत गन्ना सहकारी समितियों से की। 1991 में बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन छह महीने बाद पद छोड़ दिया। बाद में उन्होंने बारामती विधानसभा क्षेत्र से कई बार चुनाव जीतकर राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
1999 में शरद पवार ने कांग्रेस छोड़कर एनसीपी की स्थापना की। अजित पवार भी उनके साथ चले गए और कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में 40 साल की उम्र में सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बने। उन्हें सिंचाई मंत्रालय का पद मिला, जिसे उन्होंने करीब 10 साल तक संभाला।
फैमिली ट्री (Img- Internet)
पवार परिवार महाराष्ट्र का एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार है, जिसमें कुल 11 भाई-बहन थे- 7 भाई और 4 बहनें। इनमें से शरद पवार नौवें नंबर पर हैं। उनके माता-पिता, गोविंदराव और शारदाबाई पवार, परिवार की नींव बने। शारदाबाई पवार का जन्म 12 दिसंबर 1911 को कोल्हापुर के पास एक गरीब किसान परिवार में हुआ। कम उम्र में माता-पिता का निधन होने के बाद बड़ी बहन के पति श्रीपत राव जादव ने उनका सहारा लिया।
1938 में शारदाबाई पवार पुणे लोकल बोर्ड के लिए निर्विरोध चुनी गईं और 14 साल तक चुनी जाती रहीं। 1952 में घायल सांड ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी कई हड्डियां टूट गईं और जीवनभर उन्हें बैसाखी की मदद से चलना पड़ा। उनका निधन 12 अगस्त 1975 को हुआ।
अजित पवार के पिता अनंतराव पवार का निधन हो चुका है। अजित पवार की माता आशा पवार थीं, जिन्होंने इच्छा जताई थी कि उनके जीवन में अजित मुख्यमंत्री बनते देखें। अजित की पत्नी सुनेत्रा पवार पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं। उनके दो बेटे हैं पार्थ पवार, जिन्होंने 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव लड़ा और जय पवार, जो वर्तमान में व्यवसाय से जुड़े हैं।
पवार परिवार महाराष्ट्र के सातारा से बारामती तक फैला हुआ है। पूर्वज सातारा से बारामती आए और खेती में पहचान बनाई। उनके पिता गोविंदराव पवार ने गन्ना सहकारी समितियों का गठन किया। शरदाबाई पवार महिलाओं की शिक्षा और समाज सेवा में सक्रिय रहीं और बारामती महिला उत्कर्ष समिति से जुड़ी रहीं।
अजित पवार की राजनीति में कई विवाद भी आए। सिंचाई विभाग में कथित करोड़ों का घोटाला विवादों में रहा। उनके बड़े भाई वसंतराव पवार की मृत्यु डकैतों से मुठभेड़ में हुई थी।
37 साल की राजनीतिक यात्रा में अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पास करोड़ों की संपत्ति, निवेश और विभिन्न संपत्तियां थीं। सहकारी समितियों और एनसीपी में उनका योगदान उन्हें राज्य की राजनीति का प्रभावशाली चेहरा बनाता है।