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पूर्व जज आर.सी. चव्हाण (Img- X)
Mumbai: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के सरकार के महाप्लान को लागू होने से पहले ही एक बड़ा शुरुआती झटका लगा है। यूसीसी के नियम और मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति से इसके प्रमुख सदस्य और बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सी. चव्हाण ने अचानक इस्तीफा दे दिया है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व जज ने 19 सितंबर को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था। समिति का गठन 7 सितंबर को ही हुआ था और महज 12 दिनों के भीतर हुई दूसरी बैठक के बाद आए इस इस्तीफे से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व जस्टिस चव्हाण समिति की कार्यप्रणाली और बैठकों के संचालन से सख्त असहज थे। उन्होंने अपनी आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि कमेटी की बैठकों में ऐसे अनजान लोग मौजूद थे जो इसके सदस्य ही नहीं हैं।
इसके अलावा, राज्य भर से पब्लिक फीडबैक (जनता की राय) जुटाने की अपनाई जा रही प्रक्रिया पर भी उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए। बैठकों में गैर-सदस्यों की कथित मौजूदगी और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के विरोध में उन्होंने समिति से खुद को अलग कर लिया, जिससे ड्राफ्टिंग प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गए हैं।
यह इस्तीफा ऐसे संवेदनशील समय पर आया है जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में ऐलान किया था कि 2029 से पहले देश के सभी एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।
7 सितंबर को घोषित इस 7 सदस्यीय ड्राफ्टिंग समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई को सौंपी गई है। इसमें पूर्व नौकरशाह डी.के. जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, पूर्व जस्टिस एस.जी. मेहेरे, पद्मश्री रमेश पतंगे और डॉ. सुवर्णा रावल शामिल हैं। पूर्व जज के इस्तीफे से अब कमेटी के कामकाज पर दबाव बढ़ गया है।
Location : Mumbai
Published : 22 September 2026, 10:57 AM IST