इस्तीफे वाले दिन ही कर्मचारी की मौत, कंपनी COO को राहत नहीं; बॉम्बे HC ने खारिज की जमानत याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने विराज प्रोफाइल्स के COO जितेंद्र गर्ग की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। कर्मचारी प्रदीप जाधव की आत्महत्या, सुसाइड नोट और मौत वाले दिन इस्तीफा लिए जाने के आरोपों पर जानिए कोर्ट ने क्या कहा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 October 2026, 3:23 PM IST
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Mumbai: महाराष्ट्र में एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की आत्महत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विराज प्रोफाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) जितेंद्र पी. गर्ग की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

मामला कंपनी के वरिष्ठ कर्मचारी प्रदीप एस. जाधव की आत्महत्या से जुड़ा है। आरोप है कि जाधव की मौत वाले दिन उनसे हाथ से लिखा इस्तीफा लिया गया था। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और सुसाइड नोट में दर्ज आरोपों को ध्यान में रखते हुए आरोपी से हिरासत में पूछताछ को जरूरी माना।

मौत से पहले MD के बंगले पर बुलाए गए थे जाधव

अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रदीप एस. जाधव कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने वर्ष 2025 में नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज कोचर के बुलाने पर 27 दिसंबर 2025 को दोबारा काम पर लौट आए थे।

आरोप है कि इसके बाद COO जितेंद्र गर्ग ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। जाधव की 19 जून 2026 को आत्महत्या से मौत हो गई। अभियोजन का दावा है कि घटना वाले दिन उन्हें MD के बंगले पर बुलाया गया था, जहां उनसे हाथ से लिखा इस्तीफा लिया गया और उसी दिन उसे स्वीकार भी कर लिया गया।

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सुसाइड नोट में COO के खिलाफ लगाए गए आरोप

इस मामले की सुनवाई जस्टिस एनआर बोरकर की अदालत में हुई। कोर्ट ने सुसाइड नोट का भी अवलोकन किया, जिसमें जितेंद्र गर्ग के खिलाफ विशेष आरोप दर्ज होने की बात सामने आई। अदालत ने कहा कि मामले की जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

इसी आधार पर कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। मामला बोइसर पुलिस स्टेशन में दर्ज है और इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 तथा एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान लगाए गए हैं।

बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

COO जितेंद्र गर्ग की ओर से पेश वकीलों ने अभियोजन के आरोपों का विरोध किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जाति के आधार पर उत्पीड़न का आरोप बाद में जोड़ा गया है, जबकि FIR और सुसाइड नोट में इसका उल्लेख नहीं है।

वकीलों के मुताबिक, ऐसा कोई सबूत भी नहीं है जिससे साबित हो कि गर्ग को जाधव की जाति की जानकारी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध तथ्यों से आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

महिला कर्मचारी की शिकायत का भी किया गया जिक्र

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि 13 जून को एक महिला कर्मचारी ने जाधव पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया था। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील राजीव कुमार पांडे और अतिरिक्त सरकारी वकील योगेश डबके ने अग्रिम जमानत का विरोध किया।

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उन्होंने सुसाइड नोट में गर्ग के खिलाफ दर्ज आरोपों को महत्वपूर्ण बताया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए गर्ग को 10 दिन की अंतरिम राहत दी गई है।

Location :  Mumbai

Published :  30 October 2026, 3:20 PM IST

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