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विजय कुमार को 59 साल की उम्र में मिली सरकारी नौकरी (Img: X)
Baghpat: सरकारी नौकरी का सपना देखने वालों के लिए बागपत के विजय कुमार शर्मा की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है। जिस उम्र में ज्यादातर लोग नौकरी से रिटायरमेंट की तैयारी करते हैं, उस उम्र में विजय कुमार ने सरकारी शिक्षक बनने का अपना सपना पूरा किया है। करीब 27 साल तक लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और प्रयास के बाद 59 साल की उम्र में उनका चयन टीजीटी संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है।
लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजय कुमार को नियुक्ति पत्र सौंपा। नियुक्ति पत्र हाथ में आते ही वर्षों का इंतजार खत्म हो गया। खास बात यह है कि विजय कुमार पहले भी कई शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में लिखित परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन इंटरव्यू के चरण में उनका चयन रुक जाता था। इस बार भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार नहीं होने से उनका रास्ता साफ हुआ और उन्हें सरकारी शिक्षक बनने का मौका मिल गया।
बागपत के बदहवाद गांव निवासी विजय कुमार शर्मा ने वर्ष 1999 में सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया। कई बार लिखित परीक्षा में सफलता मिली, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। विजय कुमार के मुताबिक, उन्होंने हार मानने के बजाय हर परीक्षा के बाद अपनी कमियों को समझने और उन्हें सुधारने की कोशिश की। वह बताते हैं कि कई बार उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, लेकिन चयन नहीं हो पाया।
उनके पास आठ बार इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने के दस्तावेज भी रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी।
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विजय कुमार ने बताया कि वह चार बार पीजीटी और छह बार टीजीटी की लिखित परीक्षा में सफल हुए। हर बार उन्होंने अपनी पिछली गलतियों को दूर करने की कोशिश की। उनका कहना है कि तैयारी के दौरान वह किसी सवाल का जवाब समझे बिना आगे नहीं बढ़ते थे। पढ़ाई के प्रति उनका लगाव इतना था कि वह तब तक चैन नहीं लेते थे, जब तक किसी सवाल का जवाब उन्हें ठीक से समझ न आ जाए।
लगातार तैयारी के साथ उन्होंने शिक्षण कार्य भी जारी रखा। पिछले करीब 26 वर्षों से वह बड़ौत के पास स्थित दून पब्लिक स्कूल में निजी शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाते रहे हैं।
विजय कुमार की सफलता में उनके लंबे शिक्षण अनुभव की भी अहम भूमिका रही। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। विजय कुमार का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के दौरान उन्होंने खुद भी काफी कुछ सीखा। विद्यार्थियों का सहयोग और स्कूल का माहौल उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। स्कूल प्रबंधक प्रशांत के मुताबिक, विजय कुमार ने नौकरी करते हुए कभी सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी नहीं छोड़ी। उनकी मेहनत और लगातार प्रयास का असर अब उनके चयन के रूप में सामने आया है।
विजय कुमार के परिवार का शिक्षा से पुराना जुड़ाव रहा है। उनके पिता लक्ष्मण सिंह भी सरकारी अध्यापक थे। शायद यही वजह रही कि शिक्षक बनने का सपना उनके लिए हमेशा खास रहा। उनके परिवार में भी सरकारी सेवा से जुड़ाव दिखाई देता है। विजय कुमार के पांच बच्चे हैं। उनके दो बेटे उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी कर रहे हैं। तीन बेटियां हैं। इनमें से एक बेटी का चयन भी शिक्षण पद के लिए हुआ है, हालांकि वह फिलहाल प्रतीक्षा सूची में है।
विजय कुमार की उम्र करीब 59 वर्ष 8 महीने है। सरकारी शिक्षक के पद पर सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष है। इस हिसाब से उन्हें करीब दो साल चार महीने तक सरकारी शिक्षक के रूप में सेवा देने का अवसर मिलेगा। समय भले ही कम हो, लेकिन विजय कुमार के लिए यह नियुक्ति वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। उनके गांव और स्कूल में उनकी सफलता को लेकर खुशी का माहौल है।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद विजय कुमार ने इसे अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 1999 से उन्होंने आयोग की परीक्षाएं देना शुरू किया था और कई बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयन नहीं हो सका। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार मेहनत जरूरी है। उनके मुताबिक, उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर व्यक्ति प्रयास करना बंद नहीं करता तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बना रहता है।
Location : Baghpat
Published : 25 September 2026, 3:05 PM IST