
देवघर में पशु अस्पताल
Deoghar: झारखंड के देवघर जिले में इन दिनों एक ऐसी समस्या सामने आ रही है, जिसने पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकारी पशु अस्पतालों में दवाओं की कमी ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। इलाज के लिए पहुंचे लोग खाली हाथ लौट रहे हैं या फिर मजबूरी में महंगी प्राइवेट दवाएं खरीदने को विवश हैं।
अस्पतालों में दवाओं का टोटा
जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक पशु अस्पतालों में दवाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है। मधुपुर, सारठ और सोहरायठाढ़ी जैसे इलाकों में जरूरी दवाइयों का स्टॉक पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों में जांच की सुविधा तो मौजूद है, लेकिन दवा के बिना इलाज अधूरा रह जा रहा है।
प्राइवेट दुकानों पर बढ़ी निर्भरता
जब सरकारी अस्पतालों में दवा नहीं मिलती, तो पशुपालकों के पास एक ही विकल्प बचता है प्राइवेट मेडिकल स्टोर। यहां दवाएं ऊंची कीमत पर मिल रही हैं, जिससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो गई है, जहां पशुपालन ही लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है।
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गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें
भीषण गर्मी के चलते पशुओं में हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय पर समय से इलाज बेहद जरूरी होता है, लेकिन दवाओं की कमी इस जरूरत को पूरा नहीं होने दे रही। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका लगातार बनी हुई है।
व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
हर साल पशु अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीद का बजट तय किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी उपलब्धता संतोषजनक नहीं है। इससे साफ है कि दवा आपूर्ति और वितरण व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी खामी है। यही वजह है कि यह समस्या पूरे जिले के अलग-अलग प्रखंडों में लगातार बनी हुई है।
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बढ़ती चिंता, कब मिलेगा समाधान?
कुल मिलाकर, देवघर जिले में पशु अस्पतालों की यह स्थिति पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सस्ती और सुलभ इलाज की उम्मीद रखने वाले लोग अब महंगी दवाओं के सहारे हैं। अगर जल्द इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
Location : Deoghar
Published : 21 April 2026, 3:48 PM IST