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प्रतीकात्मक छवि
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में दो सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान किया गया है, जिसमें पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता अहम रही। दोनों देशों ने इस समझौते को अपनी-अपनी जीत बताया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह डील ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित मानी जा रही है।
सीजफायर के तुरंत बाद ईरान ने एक नई रणनीति के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की योजना बनाई है। ईरान का कहना है कि वह हर जहाज से लगभग 2 मिलियन डॉलर तक की फीस वसूलना चाहता है, हालांकि यह शुल्क जहाज के कार्गो के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
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ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस टोल व्यवस्था में अपने पड़ोसी देश ओमान को भी हिस्सा देने पर विचार कर रहा है, जिससे मस्कट को आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसके लिए दोनों देश मिलकर एक प्रोटोकॉल तैयार करने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं, जिसमें जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने के लिए विशेष परमिट और लाइसेंस लेने होंगे।
ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ स्थायी शांति डील चाहता है और इसके लिए उसने होर्मुज स्ट्रेट को हथियार बना लिया। ईरान ने कहा कि यह 2 मिलियन डॉलर की फीस अलग-अलग जहाजों पर अलग-अलग रहेगी। यह उसके कार्गो पर निर्भर करेगा। ईरान ओमान के साथ मिलकर एक प्रोटोकॉल बना रहा है जिसके जरिए जहाजों को होर्मुज से गुजरने के लिए परमिट और लाइसेंस लेना होगा। ओमान ने कहा है कि वह इस बारे में ईरान के साथ विकल्पों पर बातचीत कर रहा है लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। वहीं अंतरराष्ट्रीय कानून UNCLOS की बात करें तो एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर पड़ोसी देश फीस की मांग नहीं कर सकते हैं।
हालांकि, ओमान ने ईरान के इस प्रस्ताव से दूरी बनाते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर किसी प्रकार का टोल लगाना संभव नहीं है। ओमान के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और विकल्पों पर बातचीत जारी है।
Location : New Delhi
Published : 9 April 2026, 2:47 PM IST