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अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध 36वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार हमलों, फाइटर जेट गिराए जाने के दावों, और सीजफायर ठुकराए जाने के बीच हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। हजारों मौतों और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया की नजरें इस खतरनाक टकराव पर टिकी हैं।
ईरान ने ठुकराया सीजफायर (Img: Google)
New Delhi: मध्य पूर्व की जमीन इन दिनों बारूद की गंध से भरी हुई है। आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना है और जमीन पर चीख-पुकार। अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह भीषण युद्ध अब 36वें दिन में पहुंच चुका है और हर गुजरते दिन के साथ हालात और खतरनाक होते जा रहे हैं। यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई, बल्कि अब यह एक ऐसा संघर्ष बन चुका है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक कम से कम 2,076 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं 26,500 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। अस्पतालों में जगह कम पड़ रही है, और मेडिकल सुविधाएं भी चरमराने लगी हैं। हर दिन नई लाशें और नए घायलों की खबरें आ रही हैं, जिससे हालात की गंभीरता साफ झलक रही है।
इस बीच ईरान ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने अमेरिका के दो लड़ाकू विमान मार गिराए हैं। इनमें एक F-15E फाइटर जेट और दूसरा A-10 अटैक एयरक्राफ्ट शामिल है। ईरान के मुताबिक, F-15E को उसके क्षेत्र में गिराया गया, जिसमें सवार एक क्रू मेंबर को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। वहीं ईरानी मीडिया का दावा है कि A-10 विमान पर्शियन गल्फ में गिरा।
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अमेरिकी सेना इस समय अपने लापता पायलट को खोजने में जुटी हुई है। सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन यह मिशन भी खतरे से खाली नहीं रहा। ईरान की तरफ से की गई फायरिंग में इन हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाया गया। हालांकि उन्हें नुकसान जरूर हुआ, लेकिन वे क्रैश होने से बच गए।
ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने “नए एडवांस डिफेंस सिस्टम” के जरिए अमेरिकी विमानों को गिराया है। यह दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका पहले ही कह चुका था कि उसने ईरान की एयर डिफेंस क्षमता को काफी हद तक खत्म कर दिया है। ऐसे में ईरान का यह बयान अमेरिका के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
तनाव कम करने के लिए अमेरिका की तरफ से 48 घंटे का सीजफायर प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन ईरान ने इसे ठुकरा दिया। फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यह प्रस्ताव एक तीसरे देश के जरिए तेहरान पहुंचा था। ईरान का यह फैसला बताता है कि फिलहाल वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहीं अमेरिका की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बयान देते हुए कहा है कि इन घटनाओं का ईरान के साथ संभावित बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता।