West Asia Tension: भारत में बढ़ सकती है गरीबी और महंगाई, UNDP की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

UNDP की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव से भारत में 25 लाख लोग और गरीब हो सकते हैं। तेल, खाद और इलाज महंगा होने की आशंका। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 15 April 2026, 6:57 AM IST
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New Delhi: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट), विशेषकर ईरान और उसके आसपास जारी सैन्य संघर्षों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ता दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस तनाव के कारण भारत में गरीबी बढ़ सकती है और विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

25 लाख और लोग हो सकते हैं गरीब

UNDP की रिपोर्ट "पश्चिम एशिया में सैन्य शक्ति का विस्तार" के मुताबिक, इस संकट की वजह से भारत में गरीबी दर 23.9% से बढ़कर 24.2% होने की आशंका है। इसका सीधा मतलब यह है कि लगभग 25 लाख और लोग गरीबी रेखा के नीचे आ सकते हैं। इससे देश में कुल गरीब लोगों की संख्या बढ़कर 35.4 करोड़ तक पहुँच सकती है।

महंगाई और बजट पर दोहरी मार

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कच्चे तेल (Energy) और माल ढुलाई की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट बिगड़ रहा है।

  • तेल और गैस: भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन और खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं।

  • खेती पर असर: भारत उर्वरक (Fertilizer) के लिए भी इसी क्षेत्र पर निर्भर है। संकट के कारण खेती की लागत बढ़ सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

व्यापार और उद्योगों को नुकसान

पश्चिम एशिया भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। भारत के कुल निर्यात का 14% और आयात का लगभग 21% हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है।

  • छोटे उद्योग: स्टील, आभूषण (Jewellery), कंस्ट्रक्शन मटेरियल और टूरिज्म सेक्टर पर इसका सबसे बुरा असर पड़ने की संभावना है।

  • सप्लाई चेन: समुद्र में तनाव की वजह से माल पहुँचने में देरी हो रही है और इंश्योरेंस व माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है।

इलाज होगा महंगा

रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव से मेडिकल उपकरणों की कीमत 50% तक बढ़ सकती है। दवाओं की लागत पहले ही 10-15% बढ़ चुकी है, जिससे आम जनता के लिए स्वास्थ्य सेवाएं महंगी और कठिन हो जाएंगी।

बचाव का रास्ता क्या है?

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान संकट दुनिया भर के देशों के लिए एक चेतावनी की तरह है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भविष्य के जोखिमों से बचने के लिए अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और अधिक मजबूत करना होगा। इसके साथ ही, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सोलर और विंड एनर्जी जैसे नवीकरणीय विकल्पों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। साथ ही, बाहरी झटकों के असर को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन को और अधिक बेहतर और लचीला बनाना होगा।

 

Location :  New Delhi

Published :  15 April 2026, 6:57 AM IST

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