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चौतरफा दबाव के बाद बदला काठमांडू का फैसला (Img- X)
Kathmandu: नेपाल में भोटकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भयंकर फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) और भीषण भूस्खलन ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। शुरुआती दौर में नेपाल सरकार ने यह दावा किया था कि उसकी घरेलू एजेंसियां इस आपदा से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं और उसे विदेशी मदद की जरूरत नहीं है।
हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ता गया, विभिन्न देशों का दबाव भी गहराने लगा। आखिरकार अपनों को खो चुके विदेशी नागरिकों के परिजनों की उम्मीदों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नेपाल सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा। अब विदेशी विशेषज्ञ टीमों को खोज, बचाव और शवों की पहचान के काम में लगा दिया गया है।
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में व्यापक तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 550 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 1,924 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है, जिनकी संख्या करीब 288 बताई जा रही है।
इसके अलावा चीन, अमेरिका, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के कई नागरिक भी इस आपदा के बाद से गायब हैं। पहाड़ों पर संचार व्यवस्था ठप होने और सड़कें बह जाने से पीड़ितों तक पहुंचना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
सबसे भयावह स्थिति अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (पनबिजली परियोजना) स्थल पर बनी हुई है। जब बाढ़ और चट्टानें खिसकने का सिलसिला शुरू हुआ, तब वहां करीब 1,350 मजदूर और कर्मचारी काम कर रहे थे। इनमें से लगभग 576 कर्मचारी अभी भी लापता हैं।
अंदेशा जताया जा रहा है कि इनमें से कई लोग जलमग्न सुरंगों या मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। मुश्किल पहाड़ी इलाकों और टनल के अंदर फैले कीचड़ के कारण सामान्य बचाव दल वहां तक पहुंचने में असमर्थ रहे।
संकट की इस घड़ी में भारत ने पड़ोसी का धर्म निभाते हुए तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। भारत सरकार ने नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) की टीमों के साथ-साथ टनल रेस्क्यू (सुरंग बचाव) के माहिर विशेषज्ञों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को नेपाल भेजा है।
इसके अलावा राहत सामग्री के तौर पर खाद्य सामग्री, पानी साफ करने वाली गोलियां, पोर्टेबल जनरेटर और आवश्यक किट भी बड़ी मात्रा में काठमांडू भेजे गए हैं।
Nepal Flood: नेपाल बाढ़ से बचकर आए भारतीयों ने सुनाई रोंगटे खड़े करने वाली आपबीती
भारत और चीन के अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेष टीमें भी नेपाल में मोर्चा संभाल रही हैं। नेपाल प्रशासन का मानना है कि बेहद कठिन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और एडवांस फॉरेंसिक जांच की सख्त जरूरत है। यह विदेशी एक्सपर्ट टीमें मुख्य रूप से मुश्किल टनल सर्च ऑपरेशन चलाने, फॉरेंसिक जांच करने और शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्टिंग जैसे जटिल तकनीकी कामों को अंजाम देंगी।
Location : Kathmandu
Published : 29 August 2026, 9:55 AM IST