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New Delhi: कोलंबिया में भूकंप ने तबाही मचाई है। जोरदार भूकंप के चलते 47 लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें ढह गईं। कैली में कम से कम 20 इमारतों के ढहने और लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली। भूकंप के कारण कई हवाई अड्डों पर उड़ानें भी प्रभावित हुईं।
भूकंप के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपने घरों व इमारतों से बाहर निकल आए। ताजा जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोगों के इमारतों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है। भूकंप के झटके राजधानी बोगोटा तक महसूस किए गए, जिसके बाद कई लोगों को अपने घर खाली करने पड़े।
यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र 115 किलोमीटर की गहराई में था। झटके पड़ोसी देश इक्वाडोर तक महसूस किए गए।
क्विब्डो शहर में भूकंप ने मचाई तबाही
भूकंप के कारण कोलंबिया के कई हिस्सों में हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुईं। विमानन अधिकारियों के मुताबिक, पेरेरा, मनिजालेस, क्विब्दो, आर्मेनिया, कार्टागो और बुएनावेंतुरा के हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचा है। यात्रियों और विमानों की सुरक्षा की जांच के दौरान इन हवाई अड्डों पर उड़ानें रोक दी गईं। डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट की नेशनल इकाई, स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर नुकसान की जानकारी जुटा रही है। राजधानी बोगोटा के मेयर कार्लोस गालान ने कहा कि शहर में बड़े नुकसान की कोई जानकारी नहीं मिली है।
भूकंप के झटके वेनेजुएला के सीमावर्ती इलाकों में भी महसूस किए गए। ताचिरा और बारकिसिमेतो में लोगों ने झटके महसूस होने की जानकारी दी। कोलंबिया दक्षिण अमेरिका के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है।यहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं और फॉल्ट रीजन मौजूद हैं. कोलंबियाई भूवैज्ञानिक सेवा के मुताबिक, देश में 100 से ज्यादा विनाशकारी भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं।
कोलंबिया में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं
कोलंबिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल हजार से ज्यादा छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। कोलंबिया में बार-बार भूकंप आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश 'रिंग ऑफ फायर' नाम के भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्र में आता है।
यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी जैसी कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनमें से एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती रहती है। इसी वजह से जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है, जिससे अक्सर तेज भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
Location : New Delhi
Published : 10 August 2026, 10:34 PM IST
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