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लोकप्रिय लोकगायिका और बीजेपी प्रत्याशी मैथिली ठाकुर बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में अलीनगर सीट से मैदान में हैं। लेकिन वोटिंग से कुछ घंटे पहले उन्होंने एक ऐसा वीडियो जारी किया, जो उनकी राजनीतिक यात्रा पर भारी पड़ सकता है।
बीजेपी प्रत्याशी मैथिली ठाकुर
Patna: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग जोरों पर है। इसी बीच मिथिला की प्रसिद्ध लोकगायिका और बीजेपी प्रत्याशी मैथिली ठाकुर का नाम एक बड़े विवाद में आ गया है। दरअसल, अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहीं मैथिली ने मतदान से ठीक कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को वोट देने की अपील कर दी।
मैथिली ठाकुर ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर लिखा, “बिहार है तैयार, फिर NDA सरकार… अलीनगर के जन-जन ने 6 नवंबर को EVM क्रमांक 1 पर कमल निशान दबाकर सुशासन, प्रगति और स्थिरता की सरकार चुनने का प्रण लिया है।” इस पोस्ट के साथ साझा किए गए वीडियो में उन्होंने समर्थकों से सीधे बीजेपी को वोट देने की अपील की। लेकिन यही अपील अब उनके लिए भारी साबित हो सकती है।
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भारत का जन प्रतिनिधि अधिनियम, 1951 चुनावी आचार संहिता से जुड़े नियमों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। इस अधिनियम की धारा 126(1)(B) के तहत मतदान शुरू होने से 48 घंटे पहले और मतदान खत्म होने तक किसी भी प्रकार का प्रचार, बयान या ‘इलेक्शन मैटर’ जनता तक पहुंचाना वर्जित है। ‘इलेक्शन मैटर’ का अर्थ है- ऐसा कोई भी संदेश या सामग्री जो मतदाता के निर्णय को प्रभावित करे, चाहे वह किसी पार्टी या प्रत्याशी के पक्ष में हो या विरोध में। इस नियम के उल्लंघन पर दो साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
अगर मैथिली ठाकुर यह चुनाव जीत भी जाती हैं, तो भी यह विवाद उनके लिए गले की फांस बन सकता है। अगर चुनाव परिणाम के बाद कोई व्यक्ति या संगठन इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग या अदालत में पहुंचता है और मैथिली दोषी पाई जाती हैं, तो उनकी विधायकी रद्द हो सकती है। कानून के तहत, अगर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो वह स्वचालित रूप से अपनी सदस्यता खो देता है।
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मैथिली का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई यूजर्स ने इसे चुनावी आचार संहिता का खुला उल्लंघन बताया है और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी लोकप्रियता के बावजूद मैथिली का यह कदम “अनुभव की कमी” दर्शाता है। वहीं, अब तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मैथिली ठाकुर, जो लोकसंगीत से लोगों के दिलों में जगह बना चुकी हैं, अब राजनीति के मैदान में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन यह वीडियो मामला उनके लिए करियर की बड़ी ठोकर साबित हो सकता है। जहां एक ओर वह अपने गीतों से बिहार की आवाज बन चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर एक “गलती” उनकी राजनीतिक आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर सकती है।
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