7 साल के बच्चे बने 29 साल के मजदूर! मनरेगा में ऐसा खेल, जिसने खोल दी सिस्टम की पोल

ब्रह्मणा पंचायत में मनरेगा से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्कूली बच्चों को कागजों में बालिग मजदूर दिखाकर जॉब कार्ड बनाए गए और उनके नाम पर मजदूरी का भुगतान भी हो गया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 19 June 2026, 6:08 PM IST
google-preferred

Chatra: सरकार की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासन बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। सदर प्रखंड की ब्रह्मणा पंचायत में आरोप है कि स्कूली बच्चों को सरकारी रिकॉर्ड में बालिग मजदूर दिखाकर उनके नाम पर जॉब कार्ड बनाए गए और फिर उन्हीं कार्डों के जरिए लाखों रुपये की मजदूरी का भुगतान करा लिया गया।

मामले के सामने आने के बाद पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर आरोप सही साबित हुए तो यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में बड़े स्तर पर हेराफेरी का मामला होगा।

बच्चों की उम्र बदली और बना दिया मजदूर

जानकारी के अनुसार मध्य विद्यालय दुम्बी में पढ़ने वाले सातवीं और आठवीं कक्षा के कई बच्चों की वास्तविक उम्र 7 से 9 वर्ष बताई जा रही है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इन्हें 19 से 29 वर्ष का दिखाकर मनरेगा जॉब कार्ड जारी कर दिए गए। यही नहीं, इन जॉब कार्डों पर मजदूरी की मांग भी दर्ज की गई और अलग-अलग योजनाओं में काम करने का रिकॉर्ड दिखाते हुए भुगतान तक कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बच्चे स्कूल में पढ़ रहे थे या मनरेगा में मजदूरी कर रहे थे?

15 घंटे से अंधेरे में डूबे 96 गांव! आखिर ऐसी क्या हुई गड़बड़ी कि डेढ़ लाख लोग हो गए परेशान?

कागजों में बनी योजनाएं

ग्रामीणों और सूत्रों का दावा है कि जिन योजनाओं में मजदूरी भुगतान दिखाया गया है, उनमें से कुछ योजनाओं का जमीन पर कोई अस्तित्व ही नहीं है। आरोप है कि कई योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रहीं, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। अगर जांच में यह बात सही साबित होती है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा मामला माना जाएगा।

कई लोगों की भूमिका पर उठे सवाल

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय मुखिया, रोजगार सेवक, पंचायत सचिव, बीपीओ और प्रखंड कार्यालय के कुछ कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जॉब कार्ड बनाना, लेबर डिमांड दर्ज करना और भुगतान जारी करना कई स्तरों से गुजरने वाली प्रक्रिया है। ऐसे में बिना कई लोगों की जानकारी के यह संभव नहीं लगता। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फर्जी हाजिरी और मेठ आईडी का भी खेल?

आरोप यह भी है कि एक बिचौलिया अपने मोबाइल से मेठ आईडी संचालित कर योजनाओं में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करता था। इसी आधार पर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी। सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि पिछले तीन महीनों से मनरेगा कर्मियों की हड़ताल चल रही है।

बच्चों के खातों से किसने निकाला पैसा?

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन बच्चों के नाम पर जॉब कार्ड बनाए गए, उनके बैंक खातों में मजदूरी राशि भेजे जाने की भी चर्चा है। अब सवाल उठ रहा है कि अगर पैसा खातों में गया तो उसकी निकासी किसने की? क्या बच्चों के अभिभावकों को इसकी जानकारी थी या फिर किसी और ने पूरा खेल संचालित किया? यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

सिस्टम से उठ रहे बड़े सवाल

बच्चों को बालिग दिखाकर जॉब कार्ड किसने बनवाए?
फर्जी दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
लेबर डिमांड किसकी आईडी से जनरेट हुई?
भुगतान से पहले जांच क्यों नहीं हुई?
बच्चों के खातों से राशि किसने निकाली?
जिन योजनाओं में भुगतान हुआ, क्या वे वास्तव में मौजूद हैं?
किन अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही?

अधिकारियों ने क्या कहा?

रोजगार सेवक जदु नंदन ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि हड़ताल समाप्त होने के बाद शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं बीपीओ रामकुमार सिंह ने कहा कि मामला गंभीर प्रतीत होता है। उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंचे डीएम, रजिस्टर खुला तो लगाई फटकार! एक साथ 29 कर्मचारी मिले गायब

उप विकास आयुक्त अमरेंद्र सिंहा ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर बच्चों के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड और भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच पर टिकी सबकी नजर

ब्रह्मणा पंचायत में सामने आए इस कथित फर्जीवाड़े ने मनरेगा की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बच्चे सरकारी रिकॉर्ड में वर्षों तक मजदूर बने रहे, तो जिम्मेदार लोगों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

अब ग्रामीणों से लेकर प्रशासन तक सभी की नजर जांच पर टिकी है। देखना होगा कि जांच में सच्चाई सामने आती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

Location :  Chatra

Published :  19 June 2026, 6:08 PM IST

Advertisement