DN Investigation: एक नहीं, दो नहीं… लगातार तीन SC/ST की FIR, जानिये कैसा अभ्यस्त अपराधी है मनोज तिवारी

कानून की आंखों में धूल झोंक कैसे बचा जा सकता है, इसका ज्वलंत उदाहरण है महराजगंज जनपद का एक ताजा मामला। पिछले कई दिनों से निचलौल के सिंहपुर का निवासी मनोज तिवारी अपने आपराधिक कृत्यों को लेकर चर्चा के केन्द्र में है। डाइनामाइट न्यूज़ ने अपनी इंवेस्टिगेशन में पाया है कि इस पर अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 तक तीन अलग-अलग पीड़ितों ने दलित उत्पीड़न की FIR दर्ज करायी है।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 26 July 2026, 8:53 AM IST
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महराजगंज: पिछले पांच दिनों से जिले में चर्चा के केंद्र बने मनोज तिवारी की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच में डाइनामाइट न्यूज़ के खोजी संवाददाताओं ने खंगाली तो हमारे हाथ तीन ऐसे एफआईआर दस्तावेज लगे हैं, जो कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इन तीनों मामलों में शिकायतकर्ता अलग-अलग हैं, घटनास्थल अलग-अलग हैं, लेकिन एक समानता है दलितों के उत्पीड़न की।
दस्तावेजों के अनुसार अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 के बीच मनोज तिवारी के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए। इन तीनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की।

पहली बार दलित उत्पीड़न

28 अक्टूबर 2023 को थाना कोठीभार में एफआईआर संख्या 444/2023 दर्ज हुई। शिकायतकर्ता मुन्ना प्रसाद ने आरोप लगाया कि काम के दौरान मनोज तिवारी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और धमकी दी। इस मुकदमे में भी एससी/एसटी एक्ट की धाराओं 3(1)(घ) तथा 3(2) (VA) के साथ आईपीसी की धारा 504 और 506 लगाई गई।
दूसरी बार दलित उत्पीड़न

31 अक्टूबर 2023 को थाना घुघली में दर्ज एफआईआर संख्या 466/2023 में रामा प्रसाद ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान मनोज तिवारी ने कथित रूप से कमीशन की मांग की, विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराओं 3(1)(घ) तथा 3(2) (VA) के साथ आईपीसी की धारा 504 और 506 लगाई गई।

तीसरी बार दलित उत्पीड़न

5 मार्च 2024 को थाना कोठीभार में दर्ज एफआईआर संख्या 92/2024 अत्यंत गंभीर है। शिकायतकर्ता रामा ने आरोप लगाया कि पहले कुछ लोगों ने खुद को राजस्व विभाग का कर्मचारी बताकर समझौते के कागज पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की। विरोध करने पर मनोज तिवारी और अन्य लोगों ने कथित रूप से घर में घुसकर मारपीट की, जातिसूचक गालियां दीं, सामान तोड़ा और बाद में रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकी भी दी। इस मुकदमे में आईपीसी की धारा 420, 452, 427, 147 सहित कई गंभीर धाराएं और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं 3(1)(घ) तथा 3(2) (VA) दर्ज की गईं।

तीनों मुकदमों में क्या है समानता?

डाइनामाइट न्यूज़ के पास उपलब्ध अभिलेखों के अध्ययन में तीन समान अहम तथ्य सामने आते हैं।
1. तीनों मामलों में आरोपी के रूप में मनोज तिवारी का नाम दर्ज है।
2. तीनों मामलों में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।
3. शिकायतकर्ताओं ने जातिसूचक अपमान, धमकी और दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए हैं, जबकि तीसरे मामले में धोखाधड़ी, घर में घुसकर हमला और तोड़फोड़ जैसे आरोप भी हैं।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

लगातार कुछ महीनों के भीतर अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा दर्ज इन तीन एफआईआर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज संयोग है कि तीनों मामलों में आरोपी एक ही व्यक्ति है? क्या जांच एजेंसियों ने इन मामलों के बीच किसी संभावित संबंध या पैटर्न की पड़ताल की? डाइनामाइट न्यूज़ को एक चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी कि इन तीनों ही एफआईआर में आरोपी मनोज तिवारी ने जेल जाने के डर से वादियों से माफी मांग सुलह-समझौता कर लिया। भले इन मामलों में पुलिस ने FR लगा दिया हो लेकिन इससे अभ्यस्त किस्म के अपराधी मनोज तिवारी के क्राइम हिस्ट्री पता चलता है।

तीनों FIR में पुर्नविवेचना की उठी मांग

डाइनामाइट न्यूज़ पर खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय लोग दलित उत्पीड़न के इन तीनों FIR में पुर्नविवेचना की मांग कर रहे हैं ताकि आरोपी मनोज तिवारी को उसके अपराधों के अनुसार सजा मिल सके।

चार FIR में पुलिस दाखिल कर चुकी है चार्जशीट

भले दलित उत्पीड़न के तीनों FIR में FR लगे हों लेकिन डाइनामाइट न्यूज़ आपको इस अभ्यस्त अपराधी की पूरी क्राइम कुंडली से बा-खबर करा रहा है। डाइनामाइट न्यूज़ की पड़ताल में इससे पहले भी मनोज तिवारी की आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े कई मुकदमे सामने आये हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उसके खिलाफ कम से कम चार ऐसे मुकदमे अलग-अलग थानों में दर्ज हैं जिनमें पुलिस आरोपपत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल कर चुकी है।

इनमें वर्ष 2023 में कोतवाली सदर में तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) एवं भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी पुष्प कुमार की शिकायत पर दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 335/2023 शामिल है, जिसमें सरकारी कार्य में बाधा, कथित अवैध वसूली और धमकी सहित आईपीसी की धारा 120-बी, 353, 384, 500 और 506 लगाई गई हैं। इसके अलावा वर्ष 2021 में कोतवाली सदर के मुकदमा अपराध संख्या 369/2021 में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के शिविर शाखा प्रभारी शिवेंद्र जौहरी की शिकायत पर धारा 352, 353 और 504 आईपीसी के तहत मामला दर्ज हुआ।

वहीं थाना निचलौल में मुकदमा अपराध संख्या 437/2021 में नवीन उपाध्याय की तहरीर पर धारा 323, 504 और 506 आईपीसी के तहत तथा मुकदमा अपराध संख्या 220/2020 में मोहन सिंह की शिकायत पर धारा 188, 269, 270, 323, 504, 506 आईपीसी एवं महामारी अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया। डाइनामाइट न्यूज़ को उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इन चारों मामलों में पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और सभी मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं।

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आरोपी- एक, FIR-7, थाने-4

जरा सोचिये आरोपी मनोज तिवारी किस दर्जे का अभ्यस्त आदतन अपराधी है कि अकेले महराजगंज जिले में ही चार अलग-अलग थानों कोतवाली, निचलौल, घुघुली और कोठीभार में इस पर अत्यंत संगीन धाराओं में मुकदमे पंजीकृत हैं। इसका मतलब यह हुआ कि यह कानून की आंखों में धूल झोंककर खुले आम अपने अपराध को अंजाम दे रहा है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।

 

Location :  महराजगंज

Published :  26 July 2026, 7:50 AM IST

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