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प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजस्व अदालतों में मुकदमों के निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही पर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राजस्व वादों के निपटारे में उदासीनता मिलने के बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से पांच तहसीलदारों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, इस मामले में संलिप्त पाए गए 13 अन्य तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राजस्व अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों की गहन समीक्षा करने के बाद यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। इस समीक्षा के दौरान विशेष रूप से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल मामलों की स्थिति का जायजा लिया गया। सरकार ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दे दिया है कि किसानों और आम नागरिकों से जुड़े भूमि व राजस्व मामलों के निपटारे में किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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लापरवाही और उदासीनता के आरोप में जिन पांच तहसीलदारों को निलंबित किया गया है, उनमें निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं-
अमित यादव - तहसीलदार, संडीला (हरदोई)
कृष्ण कुमार मिश्रा - तहसीलदार, देवरिया
सौरभ कुमार - तहसीलदार, जौनपुर
रंजन वर्मा - तत्कालीन नायब तहसीलदार (अयोध्या), संप्रति तहसीलदार (गाजीपुर)
अलख शुक्ला - तहसीलदार, प्रतापगढ़
इन अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और काम में तेजी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
राजस्व परिषद के अनुसार, यह केवल एक बार की गई कार्रवाई नहीं है, बल्कि राजस्व अदालतों के कामकाज की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की एक निरंतर प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इसके तहत जिन 13 अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं, उनके जवाब के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस रुख से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और राजस्व मामलों से जुड़े अधिकारियों को अपने कामकाज की गति तेज करने के कड़े निर्देश मिल चुके हैं।
Location : Lucknow
Published : 9 September 2026, 12:11 PM IST