
छावनी में तब्दील हुआ कटारिया गांव
Ghazipur: जिस गांव का नाम कभी गाजीपुर जिले से बाहर नहीं गया था, आज वही गांव पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। हम बात कर रहे हैं गाजीपुर के कटरिया गांव की, जहां 15 अप्रैल की रात एक 16 वर्षीय लड़की का शव नदी किनारे मिला था। शुरुआत में इस मौत को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई घटना माना गया, लेकिन जैसे ही परिजनों ने हत्या की तहरीर दी पूरा मामला पलट गया।
अब यह मामला केवल गांव या थाना स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। एक शिकायत ने प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक मामूली सा दिखने वाला मामला अचानक राजनीतिक रंग ले बैठा। इसी सच्चाई को जानने के लिए दिल्ली से करीब 850 किलोमीटर दूर डाइनामाइट न्यूज़ की टीम कटरिया गांव पहुंची और हालात का जायजा लिया। डायनामाइट न्यूज़ से इस मामले में कुछ नहीं बच सका।
15 अप्रैल की रात सियाराम विश्वकर्मा की 16 वर्षीय बेटी निशा विश्वकर्मा का शव गांव के पास नदी किनारे मिला। मौके से निशा का मोबाइल फोन, चप्पल और पर्स भी बरामद हुआ। सूचना मिलते ही करंडा कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
Akhilesh Yadav ने गाजीपुर दौरा क्यों टाला? 5 लाख मदद के बाद भी उठे न्याय पर सवाल
शुरुआत में पुलिस इस मामले को आत्महत्या मानकर जांच कर रही थी लेकिन परिजनों ने इसे हत्या बताया। निशा के पिता सियाराम विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। उन्होंने गांव के ही एक युवक हरिओम पांडे के खिलाफ तहरीर दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी हरिओम पांडे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 28, 2026
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने निशा को न्याय दिलाने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया। 22 अप्रैल को सपा का डेलिगेशन कटरिया गांव पहुंचा, लेकिन उनके पहुंचते ही गांव में तनाव की स्थिति बन गई और पथराव हो गया। इस घटना में सपा के पूर्व विधायक समेत कई लोग घायल हो गए, वहीं कुछ स्थानीय लोग और पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जिसमें कुछ सपा नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
इसी बीच अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह 29 अप्रैल को खुद पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि समाजवादी पार्टी परिवार के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाकर रहेगी।
अखिलेश यादव के संभावित दौरे को देखते हुए कटारिया गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। गांव के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया, बैरिकेडिंग की गई और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की जांच की जाने लगी। निशा के घर के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बिना प्रशासन की अनुमति के किसी को भी गांव में प्रवेश नहीं दिया जा रहा।
28 अप्रैल को समाजवादी पार्टी का एक और प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचा। इसमें सपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सीमा राजभर, पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा और अन्य नेता शामिल थे। डेलिगेशन ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा और हर संभव मदद का भरोसा दिया। हालांकि, बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर जानकारी दी कि वह 29 अप्रैल को कटारिया गांव नहीं जाएंगे और उनका दौरा स्थगित कर दिया गया है।
गाजीपुर में सपा की ओर से पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। इस बीच अखिलेश यादव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पीड़ित परिवार से मुलाकात और समर्थन को लेकर सपा का यह कदम अब चर्चा का केंद्र बन गया है।@yadavakhilesh… pic.twitter.com/1HkpttQUs6
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डाइनामाइट न्यूज़ की टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं तो कुछ इसे सामाजिक विवाद का परिणाम मान रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में आगे क्या मोड़ आता है, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक होती है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है? इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Location : Ghazipur
Published : 28 April 2026, 7:19 PM IST