न माल खरीदा, न बेचा… फिर भी बनते रहे करोड़ों के बिल, बरेली में ऐसे खुला 100 करोड़ की GST ठगी का राज

बरेली में जीएसटी धोखाधड़ी और फर्जी आईटीसी क्लेम के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जीएसटी एसआईटी और कैंट पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 12 August 2026, 12:16 PM IST
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Bareilly: बरेली में सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले फर्जीवाड़े के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यहां फर्जी फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के इनवॉइस तैयार किए जा रहे थे और इन्हीं बिलों के सहारे फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का दावा किया जा रहा था। जीएसटी एसआईटी और कैंट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में अब तक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ रहे हैं।

फर्जी फर्मों के सहारे तैयार किया जा रहा था बिलिंग का नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना किसी वास्तविक सामान की खरीद-बिक्री किए फर्जी इनवॉइस तैयार करते थे। इन बिलों का इस्तेमाल जीएसटी में फर्जी आईटीसी क्लेम के लिए किया जाता था। इस पूरे खेल में कई फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। फर्जी दस्तावेजों और बिलों के जरिए कागजों पर कारोबार दिखाया जाता था, जबकि वास्तविक तौर पर माल की खरीद-बिक्री नहीं होती थी।

डीएम कंपाउंड के सामने खोला गया था ऑफिस

पूछताछ में पुलिस को एक अहम जानकारी मिली है। आरोपियों ने डीएम कंपाउंड के सामने ऑफिस खोल रखा था, जहां फर्जी फर्मों के बिल तैयार किए जाने का आरोप है। यहीं से बिलिंग और लेनदेन से जुड़े काम को अंजाम दिया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस ऑफिस से कितनी फर्जी फर्मों का संचालन किया गया और इनके जरिए कितने इनवॉइस तैयार किए गए।

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जीएसटी कार्रवाई के बाद नेपाल भाग गया था आरोपी

इस मामले में आरोपी फरजान हाशमी को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक जीएसटी अधिकारियों की कार्रवाई के बाद फरजान नेपाल भाग गया था। वहां उसने अपनी पहचान बदलकर संदीप नाम से रहने की बात सामने आई है। आरोप है कि नेपाल में रहते हुए भी वह अपने साथियों के संपर्क में था और जंगी ऐप के जरिए नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।

मास्टरमाइंड समेत कई आरोपी पुलिस के रडार पर

जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में सागर अग्रवाल को कथित मास्टरमाइंड के तौर पर चिन्हित किया है। इसके अलावा 10 से ज्यादा आरोपियों की पहचान किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि अभी पुलिस पूरे नेटवर्क की भूमिका और प्रत्येक आरोपी के कनेक्शन की जांच कर रही है।

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लैपटॉप और मोबाइल से खुलेगा नेटवर्क का राज

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, लैपटॉप चार्जर और माउस बरामद किया गया है। पुलिस अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए खंगाल रही है। माना जा रहा है कि मोबाइल और लैपटॉप से फर्जी फर्मों, इनवॉइस, बैंक खातों और आरोपियों के बीच हुई बातचीत से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है।

100 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन ने बढ़ाई चिंता

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर है। इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद जांच एजेंसियों का फोकस अब सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी फर्जी फर्में बनाई गईं, कितने करोड़ रुपये के इनवॉइस जारी हुए और सरकारी राजस्व को वास्तविक नुकसान कितना हुआ।

Location :  Bareilly

Published :  12 August 2026, 12:16 PM IST

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