मुजफ्फरनगर में मीनाक्षी चौक पर नाबालिक छात्रों के दो गुटों के बीच सड़क पर मारपीट का वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने वीडियो के आधार पर छात्रों की पहचान कर आगे की कार्रवाई शुरू की।

घटना की जानकारी देते एएसपी सिद्धार्थ के मिश्रा
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में बुधवार को खालापार थाना क्षेत्र के मीनाक्षी चौक पर छात्रों के दो गुटों के बीच सड़क पर मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में नाबालिक छात्र आपस में हाथापाई करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस भी हरकत में आ गई। पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर मारपीट करने वाले छात्रों की पहचान और पकड़ के लिए जांच शुरू कर दी गई है। एएसपी सिद्धार्थ के मिश्रा ने मीडिया को बताया कि यह वीडियो 10 मार्च को पुलिस के संज्ञान में आया।
एएसपी सिद्धार्थ के मिश्रा ने कहा कि वीडियो में दिख रहे बच्चे 15 से 17 साल की उम्र के हैं। उन्होंने बताया कि वीडियो में लड़कों के हाथ में कोई हथियार नहीं दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब इन बच्चों की पहचान कर रही है ताकि उन्हें पकड़कर आगे की कार्रवाई की जा सके।
जानकारी के अनुसार यह घटना खालापार थाना क्षेत्र के मीनाक्षी चौक पर हुई। बताया जा रहा है कि दोनों गुटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जो बाद में हाथापाई में बदल गया। सड़क पर मौजूद लोग और वाहन चालक इस दौरान असहज स्थिति में रहे।
किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल में कैद किया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि बच्चे सड़कों पर एक-दूसरे पर बेल्ट से वार कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद आम लोग और सोशल मीडिया यूजर्स इस घटना की निंदा कर रहे हैं।
एएसपी सिद्धार्थ के मिश्रा ने कहा कि पुलिस ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है। नाबालिक छात्रों की पहचान और उनके माता-पिता से संपर्क कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के समय सड़क पर हाथ में हथियार नहीं थे, लेकिन मारपीट की वजह से माहौल तनावपूर्ण हो गया था।
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इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि नाबालिक छात्रों के बीच हिंसा को रोकने के लिए स्कूल, अभिभावक और स्थानीय प्रशासन को और अधिक सतर्क होने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल होने से बच्चों और युवाओं में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।