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लापता मोसीम मामले में नया मोड़ (Img: AI Generated Image)
Fatehpur: फतेहपुर जिले में करीब 15 महीने पहले लापता हुए मो. मोसीम का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से चल रही पुलिस जांच के बावजूद अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि मोसीम कहां हैं। पुलिस ने उनकी तलाश में वैज्ञानिक जांच का सहारा लिया, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी। इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद जांच की रफ्तार तेज हुई है। अब पुलिस की नजर इस मामले के पांच नामजद आरोपियों के नार्को टेस्ट पर है।
जांच के दौरान पुलिस ने मोसीम की मां अखबरी बेगम का डीएनए सैंपल लिया। इसके बाद फतेहपुर समेत आसपास के सात जिलों में मिले 93 लावारिस शवों के डीएनए से उसका मिलान कराया गया। हालांकि जांच का यह बड़ा प्रयास भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सका। किसी भी शव का डीएनए मोसीम की मां के डीएनए से मेल नहीं खाया। इसके बाद पुलिस ने जांच की दिशा बदलते हुए अन्य वैज्ञानिक तरीकों पर काम शुरू किया।
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मो. मोसीम मुंबई में रहकर काम करते थे। फरवरी 2025 में वह अपने गांव रसूलपुर लौटे थे। परिजनों का आरोप है कि 21 फरवरी को गांव के कुछ लोग उन्हें अपने साथ ले गए थे। इस दौरान उनके साथ मारपीट की बात भी सामने आई।परिवार का यह भी आरोप है कि 6 मार्च को एक बार फिर उन्हें घर से बुलाकर ले जाया गया, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटे। काफी तलाश के बाद भी जब उनका कोई पता नहीं चला तो उनकी बहन शाहीन बेगम ने 15 अप्रैल 2025 को गुमशुदगी दर्ज कराई।
बाद में अदालत के निर्देश पर 30 मई 2025 को पांच लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया। परिजनों का आरोप है कि मोसीम की हत्या कर शव को गायब कर दिया गया। हालांकि इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
परिजनों का कहना था कि जांच की रफ्तार धीमी है। इसके बाद शाहीन बेगम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद पुलिस ने जांच में तेजी लाई और अब तक की कार्रवाई का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया। जुलाई के पहले सप्ताह में इस मामले की सुनवाई प्रस्तावित है। पुलिस अदालत के सामने अब तक की जांच और आगे की कार्ययोजना का ब्योरा पेश करेगी।
पुलिस ने मामले में नामजद पांचों आरोपियों से नार्को टेस्ट कराने के लिए सहमति पत्र लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने हलफनामे के जरिए भी अपनी सहमति दी है। अब कोर्ट की अंतिम अनुमति और उच्च अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर नार्को टेस्ट की अनुमति मिलती है तो जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनसे मामले की गुत्थी सुलझाने में मदद मिल सकती है। हालांकि नार्को टेस्ट में दिए गए बयान अपने आप में अदालत में अंतिम साक्ष्य नहीं माने जाते, बल्कि वे जांच को नई दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।
पुलिस ने कौशांबी, बांदा, कानपुर नगर, रायबरेली, प्रतापगढ़, अमेठी और चित्रकूट में मिले लावारिस शवों का रिकॉर्ड भी खंगाला। पुराने मामलों में सुरक्षित रखे गए नमूनों की जांच की गई, लेकिन कई मामलों में समय बीत जाने के कारण डीएनए सैंपल खराब हो चुके थे। यही वजह रही कि 93 शवों की जांच के बावजूद कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
मोसीम की बहन की मांग है कि उनके भाई को जिंदा या मृत, किसी भी स्थिति में परिवार के सामने लाया जाए। अब इस पूरे मामले में लोगों की नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। वहीं पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक जांच, न्यायालय के निर्देश और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
Location : Fatehpur
Published : 30 June 2026, 3:02 PM IST