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शिकायत के बाद शुरू हुई विजिलेंस की जांच (Img: Pinterest)
Agra: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के संपत्ति विभाग से सेवानिवृत्त लिपिक गिरीश चंद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में उनकी घोषित आय और खर्च के बीच करीब 18.98 लाख रुपये का अंतर मिलने का दावा किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गिरीश चंद के खिलाफ शासन को आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। इसके बाद मार्च 2024 में विजिलेंस ने खुली जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई, जिसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी गई।
विजिलेंस के एसपी आलोक शर्मा के मुताबिक, गिरीश चंद मूल रूप से औरैया जिले के बिधूना क्षेत्र के कुदरकोट के निवासी हैं और वर्तमान में आगरा के शास्त्रीपुरम ए-ब्लॉक में रहते हैं। जांच अवधि के दौरान उनकी वैध आय लगभग 67.63 लाख रुपये आंकी गई, जबकि संपत्ति खरीदने और अन्य खर्चों पर 86.61 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई। इस तरह उनकी आय और व्यय के बीच 18.98 लाख रुपये का अंतर पाया गया।
विजिलेंस अधिकारियों ने जांच के दौरान गिरीश चंद से अतिरिक्त संपत्ति और खर्च का स्रोत स्पष्ट करने को कहा। हालांकि, वह अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेज या संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद निरीक्षक रविशंकर पांडेय की तहरीर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई।
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विजिलेंस का कहना है कि प्रदेश में रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है और न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया जाता है।
विजिलेंस विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत विभाग की हेल्पलाइन पर की जा सकती है। विभाग का कहना है कि शिकायतों पर त्वरित जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
Location : Agra
Published : 10 July 2026, 1:02 PM IST
Topics : Agra news Corruption Vigilance