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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स 2200 अंक टूटा और निफ्टी 23,300 के नीचे पहुंच गया। इंडिगो और अदानी पोर्ट्स समेत कई बड़े शेयरों में गिरावट आई। वैश्विक संकेतों का असर बाजार पर साफ दिखा। बाजार में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को सतर्क रहने के संकेत दिए हैं।
शेयर बाजार में भूचालन (Img: Internet)
Mumbai: भारतीय शेयर बाजार में आज दिन की शुरुआत ही बेहद खराब रही। प्री-ओपनिंग सेशन के दौरान Sensex में 2,200 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस अप्रत्याशित गिरावट ने बाजार खुलने से पहले ही निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और बाजार के रुख को लेकर आशंकाएं तेज हो गईं।
जैसे ही बाजार खुला, गिरावट का सिलसिला थमा नहीं। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1,600 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी 23,300 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार के शुरुआती घंटों में ही भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।
आज की गिरावट के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी दबाव देखा गया। विशेष रूप से InterGlobe Aviation (इंडिगो) और Adani Ports के शेयरों में लगभग 3% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी तेज बिकवाली देखने को मिली, जिसने बाजार को और नीचे खींचा।
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बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग और आईटी सेक्टर का रहा। बड़े बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के चलते इंडेक्स पर दबाव बना रहा। वहीं आईटी कंपनियों के शेयर भी वैश्विक संकेतों के कारण कमजोर बने रहे। इन दोनों सेक्टरों के खराब प्रदर्शन ने निवेशकों के भरोसे को झटका दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों से मिल रहे नकारात्मक संकेतों का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
भारी गिरावट के चलते छोटे और मध्यम निवेशकों में दहशत का माहौल देखा गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को सतर्क रहने के संकेत दिए हैं। कई निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे समय में घबराकर निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए। बाजार की अस्थिरता को देखते हुए लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। साथ ही पोर्टफोलियो को संतुलित रखना और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।